Tuesday, July 21

कुमार विश्वास ने उठाई यूजीसी नए नियम के खिलाफ आवाज, कहा – ‘मैं अभागा सवर्ण हूं, मेरा रौंया-रौंया उखाड़ लो’

गाजियाबाद: देश के प्रतिष्ठित कवि कुमार विश्वास ने हाल ही में यूजीसी के नए नियम के खिलाफ विरोध जताया है और सरकार से इसे वापस लेने की मांग की है। उन्होंने इस विषय में अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कविता साझा करते हुए अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।

कुमार विश्वास ने रमेश रंजन की कविता उद्धृत करते हुए लिखा:
“चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा, मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूं, मेरा रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा।”

इस कविता के माध्यम से कवि ने यूजीसी के नए नियम पर सवाल उठाया, जो 15 जनवरी 2026 से देश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू हो गया है।

नए नियम की खास बातें:
यूजीसी के इस नए कानून के तहत अब उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले ओबीसी छात्र, शिक्षक और कर्मचारी भी जातिगत भेदभाव या उत्पीड़न की शिकायत सक्षम प्राधिकारी के समक्ष दर्ज करा सकेंगे। पहले यह सुविधा केवल एससी-एसटी समुदायों तक सीमित थी। नए नियम के अनुसार प्रत्येक संस्थान में एससी, एसटी और ओबीसी के लिए समान अवसर प्रकोष्ठ स्थापित करना अनिवार्य होगा।

विरोध तेज:
यूजीसी के इस निर्णय के खिलाफ पहले ही कई विरोध स्वर उठ चुके हैं। बरेली के पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने सिटी मजिस्ट्रेट के पद से इस्तीफा दे दिया। उनका कहना था कि इस नियम के कारण सवर्ण समाज के साथ अन्याय हो रहा है। उन्होंने माघ मेले में तैनात अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए थे और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान न करने के मुद्दे पर नाराजगी जताई।

कुमार विश्वास की इस प्रतिक्रिया ने एक बार फिर देश में नए यूजीसी नियम को लेकर बहस को जोर दे दिया है।

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