Tuesday, July 21

सुप्रीम कोर्ट ने एसिड अटैक मामलों पर लिया संज्ञान, राज्यों से मांगा विस्तृत ब्योरा

 

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एसिड अटैक के मामलों पर मंगलवार को कड़ा रुख अपनाया और सभी राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों से ऐसे मामलों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने को कहा। कोर्ट ने कहा कि सरकारों को साल-दर-साल एसिड अटैक की घटनाओं की संख्या, अदालतों में उनकी स्थिति और पीड़ितों के पुनर्वास के लिए उठाए गए कदमों का पूरा ब्योरा पेश करना होगा।

 

 

 

सुप्रीम कोर्ट ने क्या मांगा

 

चीफ जस्टिस की अगुआई वाली बेंच ने निर्देश दिया कि प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश निम्नलिखित विवरण उपलब्ध कराए:

 

कितने मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है।

ट्रायल कोर्ट स्तर पर कितने मामलों का निपटारा हो चुका है और कितने लंबित हैं।

प्रत्येक पीड़िता का संक्षिप्त ब्योरा, जिसमें शैक्षणिक योग्यता, रोजगार, वैवाहिक स्थिति, दिया गया या दिया जाने वाला मेडिकल उपचार और उस पर हुए खर्च का विवरण शामिल हो।

पुनर्वास योजनाओं का ब्योरा, जिनमें पीड़ितों को सहायता प्रदान की गई या की जा रही है।

उन मामलों का ब्योरा, जिनमें पीड़ित को जबरन तेजाब पिलाया गया।

 

 

 

कोर्ट की सख्त टिप्पणियाँ

 

चीफ जस्टिस ने केंद्र को यह विचार करने को कहा कि कानून में बदलाव किए जाएं, ताकि एसिड अटैक के दोषियों को असाधारण सजा दी जा सके। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में एक जनहित याचिका की सुनवाई कर रही थी। याचिका में यह भी मांग की गई है कि कानून में दिव्यांगों की परिभाषा का विस्तार किया जाए, ताकि तेजाब हमलों से आंतरिक अंगों को हुए नुकसान के मामले में पीड़ितों को पर्याप्त मुआवजा और अन्य राहत मिल सके।

 

 

 

सुप्रीम कोर्ट का यह कदम एसिड अटैक जैसी भयानक घटनाओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को तेज करने और पीड़ितों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

 

 

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