Tuesday, July 21

केवल पिस्तौल तानना हत्या का इरादा साबित नहीं करता, दिल्ली अदालत का फैसला

नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने 2020 में पुलिसकर्मी की हत्या के प्रयास के आरोप में अभियुक्त सागर उर्फ रिंकू को बरी कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी पर सिर्फ पिस्तौल तानने का कृत्य हत्या करने के निश्चित इरादे का संकेत नहीं माना जा सकता।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ कुलश्रेष्ठ ने अपने 23 जनवरी 2026 के फैसले में कहा कि हेड कांस्टेबल राजेश की ओर पिस्तौल तानना, अपने आप में, किसी को जान से मारने की मंशा को प्रमाणित नहीं करता। अदालत ने यह भी कहा कि इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि यदि अन्य पुलिस अधिकारी हस्तक्षेप नहीं करते, तो आरोपी पिस्तौल का ट्रिगर दबा ही देता

अदालत ने अभियुक्त को अवैध रूप से पिस्तौल और कारतूस रखने के लिए शस्त्र अधिनियम के तहत दोषी ठहराया।

घटना 14 जुलाई 2020 की है, जब पुलिस ने भारतीय विद्या पीठ के आसपास किसी अपराध की सूचना पर सागर के घर छापा मारा। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इस दौरान सागर ने अपनी पिस्तौल निकालकर पुलिसकर्मी की ओर तानी थी। अदालत ने कहा कि ऐसे कृत्य का मकसद सिर्फ डराना भी हो सकता है, हत्या का इरादा ज़रूरी नहीं है।

न्यायाधीश ने निर्णय में स्पष्ट किया कि इन तथ्यों के आधार पर अभियुक्त को भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत दोषी नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन शस्त्र अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला न्यायालय ने इरादे और कृत्य के बीच अंतर को स्पष्ट करते हुए दिया है और यह भविष्य में ऐसे मामलों में प्रमाण और मंशा की सटीकता तय करने का मार्गदर्शक साबित हो सकता है।

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