Tuesday, July 21

भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता: जीरो टैरिफ से MSME और निर्यातकों को बड़ा फायदा

 

 

नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) हो गया है। इस समझौते से भारत के निर्यात और निवेश में वृद्धि होगी, जबकि यूरोपीय देशों को भारतीय सामानों पर शुल्क में बड़ी बचत होगी। यह सौदा दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन में अधिक इंटीग्रेट करने में मदद करेगा।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों में बड़ी उपलब्धि बताया। भारतीय उद्योग निकायों ने भी इसे ‘रणनीतिक सफलता’ बताया। CII के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि भारत को निर्यात होने वाले 99% से अधिक सामान पर ईयू में तरजीही पहुंच मिलने से भारतीय उद्योगों के लिए यह गेम-चेंजर साबित होगा।

 

किस क्षेत्र को होगा लाभ?

 

समझौते से कपड़ा, परिधान, चमड़ा और जूते, रत्न और आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, ऑटो कंपोनेंट्स, फार्मास्यूटिकल्स, आईटी और डिजिटल सेवाएं, कृषि और प्रोसेस्ड फूड उत्पाद जैसे क्षेत्र प्रमुख लाभार्थी होंगे। MSMEs और स्टार्टअप्स को भी वैश्विक सहयोग के नए अवसर मिलेंगे।

 

जीरो टैरिफ का मतलब

 

इस समझौते के तहत भारत के कई प्रमुख निर्यात उत्पादों पर ईयू में 0% टैरिफ लागू होगा:

 

| उत्पाद                 | वर्तमान टैरिफ | नया टैरिफ |

| ———————- | ————- | ——— |

| मरीन उत्पाद            | 26%           | 0%        |

| जूते                   | 17%           | 0%        |

| रसायन                  | 12.8%         | 0%        |

| परिधान और कपड़ा        | 12%           | 0%        |

| रेल और जहाज            | 7%            | 0%        |

| खिलौने और खेल का सामान | 4.7%          | 0%        |

| रत्न और आभूषण          | 4%            | 0%        |

 

CAIT के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि यह समझौता व्यापारियों, MSMEs और निर्माताओं के लिए व्यापक लाभ लाएगा। इससे तकनीक और इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा और विदेशी निवेश आकर्षित होगा।

 

वैश्विक बाजार में भारत की बढ़ती पहुंच

 

भारत का ईयू के साथ ट्रेड सरप्लस वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग 15 अरब डॉलर रहा। भारत ने 75.9 अरब डॉलर का निर्यात और 60.7 अरब डॉलर का आयात किया। यह समझौता भारतीय कंपनियों को यूरोपीय बाजारों में उच्च-मूल्य वाले उत्पादों में प्रतिस्पर्धा करने का अवसर देगा और दोनों देशों के लिए ‘विन-विन’ स्थिति पैदा करेगा।

 

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