Tuesday, July 21

यूजीसी बिल के खिलाफ सवर्ण समाज का विरोध जारी, मायावती ने तीन पॉइंट में समझाई स्थिति

लखनऊ (राहुल पराशर) – विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा 15 जनवरी 2026 से लागू किए गए नए नियम ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026’ पर सवर्ण समाज का विरोध लगातार जारी है। इस बिल के तहत सभी कॉलेज और विश्वविद्यालयों में समानता कमिटी का गठन अनिवार्य किया गया है, जिसमें एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग का प्रतिनिधित्व शामिल होगा। वहीं, सवर्ण वर्ग के प्रतिनिधित्व का अभाव इसे उनके खिलाफ माना जा रहा है।

इस मसले पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर तीन प्रमुख बिंदुओं में अपनी स्थिति स्पष्ट की:

1. जातीय मानसिकता के तहत विरोध अनुचित
मायावती ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिवाद और भेदभाव को रोकने के लिए ही यह बिल लागू किया गया है। बिल का विरोध केवल उन सवर्ण वर्ग के लोगों की जातिवादी मानसिकता के कारण हो रहा है, जो इसे अपने खिलाफ षडयंत्र मान रहे हैं। उन्होंने इसे पूर्णतः अनुचित करार दिया।

2. सबको विश्वास में लेने की जरूरत
मायावती ने कहा कि इस तरह के नियम लागू करने से पहले सभी वर्गों को भरोसे में लेना चाहिए था। इससे सामाजिक तनाव नहीं बढ़ता और विवाद भी नहीं खड़ा होता। उन्होंने सरकार और संबंधित संस्थानों से इस बात पर ध्यान देने की सलाह दी।

3. दलित-पिछड़ों को किया सावधान
बासपा प्रमुख ने दलित और पिछड़े वर्ग को चेताया कि वे स्वार्थी और भड़काऊ नेताओं के बहकावे में न आएं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग इस मसले का राजनीतिक लाभ उठाने के लिए लगातार भड़काऊ बयान देते रहते हैं, इसलिए सचेत रहना बेहद जरूरी है।

मायावती ने साफ कहा कि समानता और सामाजिक न्याय के प्रयासों को बाधित करने वाले विरोध को कोई भी स्वीकार नहीं कर सकता।

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