Tuesday, July 21

दिल्ली की दो ऐतिहासिक इमारतें कृषि भवन और शास्त्री भवन अब इतिहास बनेंगी, CCS परियोजना के लिए बुलडोजर चलेगा

नई दिल्ली: राजधानी की दो महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक इमारतें – कृषि भवन और शास्त्री भवन – अब अपनी ऐतिहासिक पहचान छोड़कर इतिहास का हिस्सा बन जाएंगी। केंद्र सरकार ने इन दोनों भवनों के स्थान पर कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (CCS) प्रोजेक्ट के तहत नई चौथी और पांचवीं इमारतें बनाने की योजना बनाई है।

कृषि भवन: हरित क्रांति का केंद्र
कृषि भवन, जिसे 1957 में बनाया गया था, स्वतंत्र भारत के कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, ग्रामीण विकास, पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य पालन मंत्रालय का मुख्यालय रहा। इस भवन में 1960 के दशक में हरित क्रांति की नींव रखी गई। डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन और मेक्सिको के कृषि वैज्ञानिक नॉर्मन बोरलॉग ने यहां किसानों और वैज्ञानिकों के साथ हरित क्रांति के कार्यक्रमों पर चर्चा की। इसी भवन से सी. सुब्रमण्यम, बाबू जगजीवन राम, शरद पवार और देवी लाल जैसे दिग्गज नेताओं ने देश के कृषि मंत्रालय का नेतृत्व किया।

शास्त्री भवन: केंद्र सरकार के अधिकांश मंत्रालयों का घर
शास्त्री भवन, 1967 में बना, राजेंद्र प्रसाद रोड (पहले क्वीन मेरी रोड) पर स्थित है। यह मानव संसाधन विकास (शिक्षा), विधि एवं न्याय, सूचना एवं प्रसारण, संस्कृति, रसायन एवं उर्वरक सहित कई मंत्रालयों का कार्यालय रहा। इसके सुंदर भित्ति चित्र सतीश गुजराल द्वारा बनाए गए, भवन को आकर्षक बनाते हैं।

ऐतिहासिक और सामाजिक पहलू
इन दोनों भवनों में सैकड़ों सरकारी कर्मचारी और अनगिनत बंदर वर्षों से एक शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में रहते और काम करते आए हैं। लंच टाइम में सरकारी कर्मचारी और बंदर के बीच का यह प्रेमपूर्ण संबंध देखना दर्शनीय होता है।

भविष्य की योजना
केंद्र सरकार की नई CCS परियोजना के तहत इन दोनों भवनों को गिराकर आधुनिक और सुविधाजनक इमारतें बनाई जाएंगी। हालांकि, भित्ति चित्रों और बंदरों के भविष्य को लेकर अभी सवाल बने हुए हैं।

 

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