Tuesday, July 21

पति ने पत्नी की ‘वर्जिनिटी टेस्ट’ की मांग की, एमपी हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

जबलपुर: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने हाल ही में वैवाहिक विवाद में पति द्वारा दायर की गई याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने अपनी पत्नी की ‘वर्जिनिटी टेस्ट’ कराने की मांग की थी। जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि यह महिला की निजता का उल्लंघन है और तलाक के उद्देश्य के लिए अप्रासंगिक है।

पति ने क्रूरता के आधार पर तलाक की याचिका दायर करते हुए कहा कि उसकी पत्नी ने शारीरिक संबंध बनाने से इनकार किया और उस पर दहेज उत्पीड़न तथा मानसिक क्रूरता के आरोप लगाए। पति का तर्क था कि पत्नी की मेडिकल जांच से यह पता लगाया जा सके कि उसने कभी शारीरिक संबंध बनाए हैं या नहीं।

हालांकि, पारिवारिक अदालत ने पहले ही इस दलील को खारिज कर दिया था। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यौन संबंध में प्रवेश करने से इनकार करना तलाक का आधार नहीं बन सकता और कई साल बाद की जाने वाली मेडिकल जांच भी अप्राकृतिक यौन संबंध की पुष्टि नहीं कर सकती।

कोर्ट ने यह भी कहा कि हाइमन की उपस्थिति या अनुपस्थिति से यौन संबंध के बारे में निष्कर्ष निकालना चिकित्सकीय रूप से संभव नहीं है। अदालत ने पति की याचिका को खारिज करते हुए महिला की निजता और गरिमा की रक्षा की।

 

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