Tuesday, July 21

रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए चौकी इंचार्ज और सिपाही केस से नाम हटाने के लिए मांगी थी घूस, पैसे फेंकने का वीडियो वायरल

वाराणसी।
भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए भ्रष्टाचार निवारण इकाई (एंटी करप्शन टीम) ने वाराणसी में एक चौकी इंचार्ज और उसके सहयोगी सिपाही को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ लिया। आरोप है कि दहेज उत्पीड़न के एक मामले में नाम हटाने के बदले पीड़ित से घूस मांगी गई थी। कार्रवाई के बाद दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है, जबकि देर रात उन्हें निलंबित कर दिया गया।

 

दहेज उत्पीड़न केस में नाम हटाने की थी डील

मामला सिगरा थाना क्षेत्र की काशी विद्यापीठ चौकी से जुड़ा है। चंदौली निवासी प्रह्लाद गुप्ता के खिलाफ करीब दो साल पहले उनकी पत्नी ने दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया था। इस केस की जांच चौकी इंचार्ज शिवाकर मिश्रा के पास थी।
पीड़ित का आरोप है कि वह इस मामले में करीब एक साल जेल में भी रह चुका है। जेल से बाहर आने के बाद चौकी इंचार्ज लगातार केस में धाराएं बढ़ाने की धमकी देकर उससे रिश्वत की मांग कर रहे थे।

 

एंटी करप्शन टीम ने बिछाया जाल

परेशान होकर प्रह्लाद गुप्ता ने एंटी करप्शन विभाग से संपर्क किया। शिकायत सही पाए जाने पर बुधवार को टीम ने जाल बिछाया। तय योजना के तहत पीड़ित को 20 हजार रुपये देकर चौकी भेजा गया।
जैसे ही प्रह्लाद गुप्ता ने चौकी इंचार्ज शिवाकर मिश्रा को पैसे देने की कोशिश की, इंचार्ज ने रकम लेने के लिए अपने सहयोगी आरक्षी गौरव द्विवेदी को बुला लिया।

 

बिजली की रफ्तार से फेंकी रिश्वत की रकम

इसी दौरान एंटी करप्शन टीम चौकी में दाखिल हो गई। टीम को देखते ही आरक्षी गौरव द्विवेदी घबरा गया और उसने अपनी जैकेट की पॉकेट से रिश्वत के 20 हजार रुपये निकालकर कूलर के पीछे फेंक दिए
पूरी घटना वहां मौजूद एक मीडिया कर्मी के कैमरे में कैद हो गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में सिपाही की घबराहट और पैसे फेंकने की तेजी साफ नजर आ रही है।

 

हंगामा, मुकदमा और निलंबन

छापेमारी के दौरान चौकी परिसर में काफी देर तक हंगामा होता रहा। एंटी करप्शन टीम ने मौके से रिश्वत की रकम बरामद कर ली।
देर रात डीसीपी काशी जोन ने चौकी इंचार्ज शिवाकर मिश्रा और आरक्षी गौरव द्विवेदी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार से संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।

 

इस कार्रवाई को पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं वायरल वीडियो ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

 

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