Tuesday, July 21

दक्षिण चीन सागर से हिंद महासागर तक: संकट का साथी बनी भारतीय नौसेना

 

नई दिल्ली: भारतीय नौसेना ने पिछले एक दशक में हिंद महासागर में अपनी स्थिति को बेहद मजबूत किया है। अब यह सिर्फ रक्षा तंत्र का हिस्सा नहीं रही, बल्कि संकट के समय सबसे भरोसेमंद और तेज़ “फर्स्ट रिस्पॉन्डर” के रूप में उभरी है। मार्च 2025 में म्यांमार और थाईलैंड में आए भीषण भूकंप के दौरान भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन ब्रह्मा और ऑपरेशन सागर बंधु के तहत राहत सामग्री, मेडिकल टीम और इंजीनियरिंग सहायता कुछ ही घंटों में प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाई।

नौसेना डिप्लोमेसी: शक्ति से विश्वास की ओर

करीब 50 साल पहले नौसेना रणनीतिकार केन बूथ ने नौसेना डिप्लोमेसी की तीन प्रमुख भूमिका बताई थी – सैन्य शक्ति, कूटनीति और पुलिसिंग। भारतीय नौसेना ने इसे सजीव रूप दिया है। उत्तरी अरब सागर के ठंडे पानी से लेकर दक्षिण चीन सागर के गर्म इलाकों तक नौसेना की भूमिका अब संकट प्रबंधन, सहयोग और विश्वास-निर्माण तक विस्तारित हो गई है।

चीन लगातार समुद्री प्रतिस्पर्धा बढ़ा रहा है, जबकि भारतीय नौसेना ने टकराव की बजाय सहयोग, संवाद और भरोसे के माध्यम से अपनी भूमिका निभाई। इसके पीछे तीन मुख्य रुझान हैं:

  1. साझा क्षेत्रीय जिम्मेदारी – भारत की समुद्री सोच अब केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि क्षेत्रीय जिम्मेदारी पर केंद्रित है।
  2. गहन द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग – नियमित युद्धाभ्यास, कोऑर्डिनेटेड पेट्रोल और संयुक्त निगरानी अभियानों के माध्यम से साझेदारी मजबूत की गई।
  3. मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) – रणनीतिक प्राथमिकता के रूप में आपदा राहत मिशन शामिल हैं।

पिछले वर्ष 2025 में नौसेना ने 18 से अधिक द्विपक्षीय और 8 बहुपक्षीय युद्धाभ्यास किए। 31 मैरीटाइम पार्टनरशिप गतिविधियों, 4 कोऑर्डिनेटेड पेट्रोल (CORPAT) और 12 संयुक्त EEZ निगरानी अभियानों में भाग लिया। INS दिल्ली, सतपुड़ा, किल्तान और शक्ति जैसे युद्धपोत सिर्फ अपनी शक्ति दिखाने नहीं, बल्कि भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता और भरोसे का संदेश देने के लिए सिंगापुर, वियतनाम और फिलीपींस के बंदरगाहों तक पहुंचे।

संकट में साथी, समुद्र में मित्र

भारतीय नौसेना ने कमजोर देशों की नौसेना को सशक्त बनाने के कई कदम उठाए हैं। श्रीलंका में मैरीटाइम रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर की स्थापना और वियतनाम तथा मोजाम्बिक को जहाज़ों का हस्तांतरण ऐसे उदाहरण हैं। इससे क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा मजबूत हुई और छोटे देशों को अपनी सुरक्षा का भरोसा मिला।

नौसेना ने हर आपदा में निष्पक्ष भूमिका निभाई है। श्रीलंका के चक्रवात, मालदीव के संकट या म्यांमार और थाईलैंड के भूकंप में भारतीय नौसेना सबसे पहले मदद पहुंचाने वाली रही। जून 2025 में केरल तट के पास चीनी जहाज MV वान हाई 503 में आग लगने पर भारतीय नौसेना ने साहसिक बचाव अभियान चलाया, जिसमें मुश्किल समुद्री परिस्थितियों में चीनी नागरिकों की जान बचाई गई।

सूचना और रणनीति में नवीनता

भारतीय नौसेना ने अपने मिशनों की गति बढ़ाने के लिए 2018 में गुरुग्राम में इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटरइंडियन ओशन रीजन (IFC-IOR) की स्थापना की। यह केंद्र 15 देशों के इंटरनेशनल लायजन ऑफिसर और 57 समुद्री सुरक्षा संगठनों के साथ समन्वय करता है, जिससे नौसेना क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा का नर्व सेंटर बन गई है।

बहुध्रुवीय सहयोग का प्रतीक

भारतीय नौसेना अब उच्चस्तरीय युद्धाभ्यासों में भी अग्रणी है। 2025 में फ्रांस के चार्ल्स गॉल कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के साथ गोवा तट पर वरुण अभ्यास, रूस के साथ INDRA अभ्यास और मॉरीशस के राष्ट्रीय दिवस में INS इम्फाल की भागीदारी इसके उदाहरण हैं। इन गतिविधियों से नौसेना ने यह संदेश दिया है कि समुद्री शक्ति को सिर्फ फायरपावर से नहीं, बल्कि भरोसे से जीता जा सकता है।

 

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