Tuesday, July 21

गाजा के पुनर्निर्माण में भारत से सहयोग की अपील, भारत निभा सकता है मध्यस्थ की भूमिका: फिलिस्तीन

 

 

फिलिस्तीन ने भारत से इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के समाधान में मध्यस्थ की भूमिका निभाने और गाजा के पुनर्निर्माण में सहयोग करने की अपील की है। भारत-अरब देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने दिल्ली पहुंचीं फिलिस्तीन की विदेश मंत्री वर्सेन शाहीन अघाबेकियन ने कहा कि भारत दोनों पक्षों के साथ अच्छे संबंधों और अंतरराष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता के कारण एक प्रभावी वार्ताकार बन सकता है।

 

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्री अघाबेकियन ने भारत की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि भारत हमेशा से टू-स्टेट सॉल्यूशन और फिलिस्तीनी जनता के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन करता रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत इजरायल और फिलिस्तीन के बीच एक सेतु बनकर शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में अहम योगदान दे सकता है।

 

उन्होंने गाजा की गंभीर मानवीय स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्र का लगभग 82 प्रतिशत बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हो चुका है और करीब 20 लाख लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। ऐसे में गाजा के पुनर्निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बेहद जरूरी है। उन्होंने मानवीय सहायता, बुनियादी ढांचे और शिक्षा के क्षेत्र में भारत द्वारा दिए जा रहे समर्थन की विशेष रूप से प्रशंसा की।

 

विदेश मंत्री ने भारत की मदद से स्थापित किए गए फिलिस्तीन डिप्लोमैटिक इंस्टीट्यूट का भी उल्लेख किया और कहा कि दोनों देशों के संबंध ऐतिहासिक और मजबूत रहे हैं। उन्होंने अधिक से अधिक देशों से फिलिस्तीन को मान्यता देने की अपील करते हुए न्यूयॉर्क घोषणापत्र को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

 

आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट रुख

 

हमास की भूमिका से जुड़े सवाल पर अघाबेकियन ने कहा कि यदि हमास को राजनीति में शामिल होना है, तो उसे पीएलओ (पैलेस्टाइन लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन) में शामिल होना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलिस्तीन हर प्रकार के आतंकवाद का विरोध करता है।

 

‘बोर्ड ऑफ पीस’ पहल का समर्थन

 

उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का स्वागत करते हुए कहा कि फिलिस्तीन ऐसा मार्ग चाहता है जो पुनर्निर्माण और स्थायी राजनीतिक समाधान की ओर ले जाए। हालांकि, जानकारों का मानना है कि इस पहल को लेकर भारत कुछ असमंजस में है, क्योंकि इसमें क्षेत्राधिकार और स्पष्टता से जुड़े सवाल बने हुए हैं।

 

राजनयिक सूत्रों के अनुसार, अरब देशों के विदेश मंत्रियों की यह बैठक भारत की सोच को समझने और क्षेत्रीय शांति प्रयासों में उसकी संभावित भूमिका को टटोलने का भी प्रयास है।

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