Tuesday, July 21

आज हाई कोर्ट में तय होंगे श्रीकृष्ण जन्मस्थान-शाही ईदगाह के ‘वाद बिंदु’

मथुरा: श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। करीब पांच साल से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे इस मामले में आज, 30 जनवरी, को इलाहाबाद हाई कोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है। देश की नजरें इस सुनवाई पर टिकी हैं, क्योंकि आज मुकदमे के मुख्य ‘वाद बिंदु’ तय होने की संभावना है।

1968 के समझौते पर नया विवाद
हिंदू पक्ष के समर्थक और श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने इस कानूनी लड़ाई की नींव 2020 में रखी थी। हिंदू पक्ष का सबसे बड़ा आरोप 1968 के समझौते पर है, जो श्रीकृष्ण जन्मभूमि सेवा संस्थान और मस्जिद कमेटी के बीच हुआ था। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह समझौता पूरी तरह अवैध है, क्योंकि जिस जमीन पर मस्जिद खड़ी है, वह राजस्व रिकॉर्ड में ‘श्रीकृष्ण जन्मभूमि सेवा ट्रस्ट’ के नाम दर्ज है। संस्थान को समझौता करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था।

हिंदू पक्ष की दलील:
हिंदू पक्ष का कहना है कि 13.37 एकड़ पवित्र भूमि के लगभग 2.50 एकड़ हिस्से पर मुगल काल (1670) में मंदिर को तोड़कर शाही ईदगाह बनाई गई थी। उनका दावा है कि मस्जिद का स्थल ही भगवान कृष्ण का मूल गर्भगृह है। खसरा-खेवट रिकॉर्ड में मस्जिद का कोई जिक्र नहीं है। साथ ही, अलेक्जेंडर कनिंघम की पुरातात्विक रिपोर्ट के हवाले से मस्जिद के खंभों पर हिंदू प्रतीकों के होने की भी दलील दी गई है।

कोर्ट कमिश्नर सर्वे पर निगाहें:
मामला तब और गरमाया जब हाई कोर्ट ने परिसर का सर्वे कराने का आदेश दिया। हालांकि, मस्जिद कमेटी की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल सर्वे प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। केस की मेरिट पर सुनवाई जारी है। हिंदू पक्ष का कहना है कि यह केवल जमीन का विवाद नहीं है, बल्कि उनके अस्तित्व और पूर्वजों’ की लड़ाई है।

अब देखना यह होगा कि आज की सुनवाई में कोर्ट किन बिंदुओं पर मुहर लगाता है और इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद का समाधान किस दिशा में होता है।

 

This slideshow requires JavaScript.

Leave a Reply

This slideshow requires JavaScript.