Tuesday, July 21

हरियाणा: एंबुलेंस नहीं मिलने पर पति और 8 साल के बेटे ने ठेले पर घर ले जाया पत्नी का शव

सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनहीनता एक बार फिर सामने आई है। फरीदाबाद के बीके अस्पताल में टीबी से पीड़ित एक महिला की मौत के बाद उसके पति और 8 वर्षीय बेटे को शव ले जाने के लिए कोई सरकारी वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया। मजबूरन उन्होंने महिला का शव ठेले पर रखकर घर तक पहुँचाया।

मृतका के पति गुनगुन ने बताया कि उनकी पत्नी पिछले तीन महीनों से बीके अस्पताल में इलाज करा रही थी। तबीयत बिगड़ने पर उसे दिल्ली के सफदरगंज और एम्स में रेफर किया गया, फिर बीके अस्पताल वापस लाया गया। अस्पताल में इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई, लेकिन शव ले जाने के लिए एंबुलेंस उपलब्ध नहीं थी।

अस्पताल परिसर में कई घंटे भटकने के बाद भी मदद नहीं मिली, इसलिए गुनगुन और उनका बेटा मजबूरी में शव को ठेले पर रखकर घर ले गए। यह यात्रा लगभग 7 किलोमीटर लंबी थी और इस दौरान पति और बेटे ने राहगीरों से मदद की गुहार लगाई।

गुनगुन मूल रूप से बिहार के सारण जिले के निवासी हैं और वर्तमान में फरीदाबाद में किराए पर रहते हैं। उन्होंने बताया कि अंतिम संस्कार के लिए भी उन्हें कर्ज लेना पड़ा।

इस मामले पर डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. एमपी सिंह ने कहा कि अस्पताल में रेडक्रॉस की ओर से ‘हर्ष वैन’ की सुविधा उपलब्ध है, जो मॉर्चरी के पास रहती है। इसके लिए अस्पताल के कंट्रोल रूम से संपर्क करना आवश्यक होता है। वहीं, निजी एंबुलेंस के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है।

यह घटना सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की तत्काल आवश्यकता को उजागर करती है और समाज के संवेदनशील पक्ष पर गहरी चोट पहुँचाती है।

 

This slideshow requires JavaScript.

Leave a Reply

This slideshow requires JavaScript.