Tuesday, July 21

नीरजा मोदी स्कूल कांड: CBSE ने हाईकोर्ट में बताया – बच्चों के लिए माहौल था असुरक्षित

जयपुर: जयपुर के प्रसिद्ध नीरजा मोदी स्कूल में 9 वर्षीय छात्रा अमायरा की दुखद आत्महत्या के मामले में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने राजस्थान हाईकोर्ट में 170 पन्नों का विस्तृत जवाब पेश किया। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा के दावे केवल कागजों तक सीमित थे और अमायरा की मौत इसी प्रणालीगत विफलता का नतीजा थी।

कागजों में ही सीमित रही सुरक्षा व्यवस्था
CBSE ने अपने जवाब में कहा कि स्कूल की एंटी-बुलिंग और पॉक्सो कमेटियां केवल नाममात्र की थीं। नौ वर्षीय अमायरा पिछले डेढ़ साल से लगातार बुलिंग का शिकार होती रही। परिजनों ने चार बार लिखित शिकायत दी, लेकिन स्कूल प्रशासन की निष्क्रियता के चलते कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। 1 नवंबर 2025 को परेशान होकर बच्ची ने चौथी मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी।

खतरनाक व्यवस्थाएं और लापरवाही
CBSE की जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि ग्राउंड फ्लोर से छात्रा बिना रोक-टोक चौथी मंजिल तक पहुंच गई। स्कूल में सीसीटीवी कैमरे थे, लेकिन लाइव मॉनिटरिंग की कोई व्यवस्था नहीं थी। छात्रों को आई-कार्ड पहनने का नियम नहीं था, जिससे घटना के तुरंत बाद यह पता लगाना मुश्किल था कि बच्ची कौन थी। घटना के स्थान से खून के धब्बे साफ कर दिए गए। स्कूल ने इसे सफाईकर्मी पर आरोपित किया, जबकि CBSE ने इसे सबूत मिटाने की साजिश करार दिया। चौथी मंजिल पर कोई सेफ्टी नेट नहीं था और प्रशिक्षित काउंसलर की भी नियुक्ति नहीं थी।

राजस्थान में बढ़ती छात्र आत्महत्याओं की चिंता
CBSE ने हाईकोर्ट को बताया कि 2020 से 2025 के बीच राजस्थान के प्रमुख शहरों – कोटा, जयपुर और सीकर – में 2,532 छात्रों ने आत्महत्या की। बोर्ड ने जोर देकर कहा कि जब तक स्कूल मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के कड़े नियम नहीं अपनाएंगे, तब तक बच्चों की जान खतरे में रहेगी। CBSE ने स्कूल की याचिका को ‘भ्रामक’ और ‘तथ्य छुपाने वाली’ बताते हुए इसे खारिज करने की मांग की है।

 

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