Tuesday, July 21

SIR प्रक्रिया: नोटिस पाने वाले मतदाताओं के नाम सार्वजनिक स्थानों पर चस्पा हों—सुप्रीम कोर्ट

 

 

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत जिन मतदाताओं के नाम तार्किक विसंगतियों की सूची में शामिल किए गए हैं, उनके नाम ग्राम पंचायत भवनों, ब्लॉक कार्यालयों और तालुका स्तर के सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित किए जाएं। अदालत ने कहा कि इन स्थानों पर संबंधित दस्तावेज और आपत्तियां भी जमा कराई जा सकेंगी।

 

यह निर्देश चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने डीएमके की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, अमित आनंद तिवारी और अधिवक्ता विवेक सिंह की दलीलों पर सुनवाई के दौरान जारी किया।

 

डीएमके ने अदालत से आग्रह किया था कि जिन मतदाताओं के नाम तार्किक विसंगतियों की सूची में डाले गए हैं, उन्हें तमिलनाडु में चुनाव से पहले मतदाता सूची में शामिल होने का दावा पेश करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए। अदालत ने माना कि ऐसे मतदाताओं को अवसर देना आवश्यक है, ताकि वे अपनी पात्रता सिद्ध कर सकें।

 

SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक समूह पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। इन याचिकाओं में एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) द्वारा दायर याचिका भी शामिल है। अदालत इस बात की जांच कर रही है कि क्या भारतीय निर्वाचन आयोग को संविधान के अनुच्छेद 326, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और उसके तहत बनाए गए नियमों के अंतर्गत वर्तमान स्वरूप में SIR कराने का अधिकार है।

 

एनआरसी जैसी प्रक्रिया का आरोप

याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि SIR एक तरह की एनआरसी जैसी अप्रत्यक्ष प्रक्रिया है, जिससे निर्वाचन आयोग नागरिकता सत्यापन का प्राधिकरण बन जाता है। उनका कहना था कि यदि किसी मतदाता की पात्रता पर संदेह हो, तो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 16 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।

 

वहीं, निर्वाचन आयोग ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नागरिकता सत्यापन से जुड़े मुद्दों को केवल निर्वाचन उद्देश्यों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। आयोग ने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया गैर-नागरिकों को देश से बाहर करने के लिए नहीं है और सत्यापन प्रक्रिया उदार व सॉफ्ट टच तरीके से की जा रही है, जिसमें किसी प्रकार की कठोर जांच शामिल नहीं है।

 

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