Tuesday, July 21

इजरायल–फिलिस्तीन संघर्ष में भारत की भूमिका पर चर्चा, विदेश मंत्री जयशंकर ने गाजा शांति योजना पर बातचीत की जानकारी दी

 

 

नई दिल्ली: भारत दौरे पर आईं फिलिस्तीन की विदेश एवं प्रवासी मामलों की मंत्री वारसेन अगाबेकियन शाहीन ने शुक्रवार को भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच गाजा शांति योजना, क्षेत्रीय घटनाक्रमों और द्विपक्षीय सहयोग को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।

 

विदेश मंत्री जयशंकर ने इस मुलाकात को लेकर संतोष व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि फिलिस्तीन की विदेश मंत्री से मिलकर खुशी हुई। उन्होंने बताया कि बैठक में गाजा में शांति स्थापना की संभावनाओं और पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर विचारों का आदान-प्रदान किया गया। साथ ही भारत और फिलिस्तीन के बीच चल रहे विकास सहयोग की समीक्षा की गई और इसे आगे बढ़ाने के लिए नई पहलों पर सहमति बनी।

 

भारत से मध्यस्थता की अपील

 

इससे एक दिन पहले, फिलिस्तीन ने भारत से इजरायल–फिलिस्तीन संघर्ष में मध्यस्थ की भूमिका निभाने और गाजा में पुनर्निर्माण प्रयासों में सक्रिय भागीदारी करने की अपील की थी। भारत और अरब देशों के विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक में भाग लेने के लिए दिल्ली आईं शाहीन ने समाचार एजेंसी पीटीआई-वीडियो से बातचीत में कहा कि भारत के फिलिस्तीन और इजरायल दोनों के साथ संतुलित और मित्रवत संबंध हैं, जो उसे एक “मध्यस्थ और वार्ताकार” की भूमिका निभाने के लिए उपयुक्त बनाते हैं।

 

‘भारत बन सकता है सेतु’

 

शाहीन ने कहा कि भारत एक बड़ा और प्रभावशाली देश है, जो शांति स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि फिलिस्तीन और इजरायल—दोनों का मित्र होना भारत को दोनों पक्षों के बीच सेतु बनने की स्थिति में रखता है। उनका कहना था कि अंतिम उद्देश्य ऐसी स्थायी शांति स्थापित करना है, जो सम्मान, अंतरराष्ट्रीय कानून और उसमें निहित सिद्धांतों पर आधारित हो।

 

गाजा को तत्काल मानवीय सहायता की जरूरत

 

फिलिस्तीन की विदेश मंत्री ने भारत से युद्धग्रस्त गाजा के पुनर्निर्माण में सहयोग बढ़ाने और फलस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (यूएनआरडब्ल्यूए) को समर्थन देने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अक्टूबर 2023 से जारी इजरायली सैन्य अभियानों के कारण गाजा में भारी तबाही हुई है और वहां तत्काल मानवीय सहायता की आवश्यकता है।

 

गौरतलब है कि भारत और संयुक्त अरब अमीरात की सह-अध्यक्षता में अरब लीग के सभी 22 सदस्य देशों की भागीदारी के साथ एक अहम बैठक 31 जनवरी को प्रस्तावित है, जिसमें क्षेत्रीय शांति और स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

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