Tuesday, July 21

बुंदेली कला को विश्व मंच पर पहचान दिलाने में यूपी सरकार की पहल, आल्हा, राई और स्वांग कलाकारों का डाटा संग्रह

झांसी (देवेश पांडेय): उत्तर प्रदेश सरकार बुंदेलखंड की समृद्ध लोक कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में गंभीर कदम उठा रही है। राज्य सरकार की योजना है कि आल्हा, बुंदेली स्वांग और राई जैसी लोक कलाओं को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कराया जाए।

इस पहल के तहत पर्यटन विभाग और संस्कृति विभाग बुंदेलखंड की लोक कलाओं, कलाकारों और उनके ऐतिहासिक महत्व का विस्तृत डेटा संग्रह कर रहे हैं। झांसी में पर्यटन विभाग, संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन इस कार्य में संयुक्त रूप से जुटे हैं।

यूनेस्को नामांकन के लिए प्रमुख लोक कलाओं में लोकगाथा आल्हा, लोकनाट्य बुंदेली स्वांग और लोकनृत्य राई को शामिल किया जा रहा है। इन कलाओं को प्रस्तुत करने वाले कलाकारों, उन्हें प्राप्त पुरस्कारों और प्रमुख उपलब्धियों का संकलन किया जा रहा है।

साथ ही, इन कलाओं से जुड़े विशेषज्ञों की सूची, उनके द्वारा प्रकाशित पुस्तकें, पत्रिकाएं और वृत्तचित्रों का विवरण भी जुटाया जा रहा है। इन कलाओं को बढ़ावा देने वाले निजी और सरकारी संस्थानों के साथ अब तक आयोजित कार्यक्रमों का रिकॉर्ड भी तैयार किया जा रहा है।

झांसी मंडल के क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी डी.के. शर्मा ने बताया कि बुंदेली कला को यूनेस्को की सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा, “इस पहल का उद्देश्य बुंदेलखंड की लोक संस्कृति और पारंपरिक कलाओं को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना है।”

 

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