Tuesday, July 21

इकलौती बेटी के माता-पिता समाज के लिए मिसाल, बेटियां भी कर रही हैं कुल का नाम रोशन – यशोधरा

 

 

आज की जेनरेशन जेड की लड़कियां अपनी जिंदगी को अपने तरीके से जीना चाहती हैं। आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और फैसले लेने की आज़ादी उनके लिए बेहद अहम हैं। मुंबई में बॉटनी और डेटा साइंस की पढ़ाई कर रही यशोधरा त्रिवेदी भी इन्हीं मूल्यों की प्रतीक हैं।

 

यशोधरा खाना बनाना, गाना और सोशल मीडिया पर कंटेंट क्रिएशन करना पसंद करती हैं। उन्हें गर्व है कि उनके माता-पिता ने कभी यह एहसास नहीं होने दिया कि “काश, बेटी नहीं बेटा होती।” माता-पिता ने हमेशा उन्हें अपने फैसले खुद लेने की आज़ादी दी और उन पर भरोसा जताया।

 

बच्चों पर भरोसा जरूरी

यशोधरा का मानना है कि जब पेरेंट्स बच्चों पर भरोसा करते हैं, तो बच्चों में जिम्मेदारी का भाव बढ़ता है। इसके अलावा, पेरेंट्स का भरोसा उन्हें मुश्किल फैसले लेने में भी सशक्त बनाता है।

 

अपने हक के लिए आवाज उठाना

यशोधरा मानती हैं कि अन्याय सहना भी एक अपराध है। जो अपने अधिकारों के लिए आवाज़ नहीं उठाते, वे अन्याय को बढ़ावा देते हैं। उनका कहना है कि आज की दुनिया में सशक्त वही है, जिसे पता हो कि उसे क्या चाहिए और जो अपने अधिकारों के लिए खड़ा हो सके।

 

खुश रहने के लिए शौक जरूरी

यशोधरा साइंस स्टूडेंट हैं, लेकिन पढ़ाई के साथ गाने, खाना बनाने और वीडियो एडिटिंग जैसे शौक भी निभाती हैं। शौक के लिए समय निकालने से उन्हें खुशी मिलती है। पेरेंट्स का भरोसा और उनका साथ उन्हें आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाता है।

 

मां ने मुश्किल समय देखा

यशोधरा को गर्व है कि उनकी मां के जमाने में लड़कियों पर कई पाबंदियां थीं, लेकिन उन्होंने अपनी बेटी को उन सीमाओं से दूर रखा। माता-पिता की समझ और समर्थन ने यशोधरा का आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्हें पढ़ाई और करियर में आगे बढ़ने का अवसर दिया।

 

बेटियां भी कर रही हैं नाम रोशन

यशोधरा मानती हैं कि अगर बेटियों को सही मौके और सम्मान मिले, तो वे किसी भी मामले में लड़कों से कम नहीं। आज देश की बेटियां अपने माता-पिता का नाम रोशन कर रही हैं और समाज की सोच धीरे-धीरे बदल रही है। यशोधरा के लिए यही सच्चा सशक्तिकरण है।

 

(फोटो साभार: यशोधरा त्रिवेदी इंस्टाग्राम)

 

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