Tuesday, July 21

जयपुर की आबोहवा बदलेगी कानोता, चंदलाई और नेवटा बांध होंगे प्रदूषण-मुक्त, जल्द बनेगी डीपीआर

राजधानी जयपुर की जलवायु और पर्यावरणीय सेहत में बड़ा सुधार आने वाला है। जलमहल स्थित मानसागर झील के कायाकल्प के बाद अब राज्य सरकार ने कानोता, चंदलाई और नेवटा बांधों को प्रदूषण-मुक्त करने की दिशा में ठोस पहल शुरू कर दी है। जल संसाधन विभाग की ओर से इन तीनों बांधों के शुद्धिकरण और दीर्घकालीन विकास के लिए वैज्ञानिक अध्ययन कराया जा रहा है, जिसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) शीघ्र ही राज्य सरकार को सौंपी जाएगी।

विशेषज्ञ एजेंसी कर रही वैज्ञानिक अध्ययन

तीनों बांधों की वर्तमान स्थिति का आकलन करने के लिए भारत सरकार से अधिकृत विशेषज्ञ एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। विशेषज्ञों की टीमें जल गुणवत्ता, प्रदूषण के स्रोतों, जल संग्रहण क्षमता और पर्यावरणीय प्रभावों का गहन अध्ययन कर रही हैं। इस अध्ययन में जीआईएस आधारित मैपिंग, आधुनिक जल उपचार तकनीक और जैव विविधता संरक्षण को प्रमुखता दी जा रही है।

जल गुणवत्ता सुधार पर रहेगा फोकस

जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने बताया कि अध्ययन के दौरान यह स्पष्ट किया जाएगा कि प्रदूषित जल किस स्रोत से, कितनी मात्रा में और किस प्रकार बांधों तक पहुंच रहा है। इसके साथ ही प्रदूषण रोकने के प्रभावी उपाय, वैकल्पिक निकासी व्यवस्था और जल प्रबंधन की ठोस योजना तैयार की जाएगी। सिंचाई के लिए बांधों से खेतों तक जल पहुंचाने की आवश्यक मशीनरी और व्यवस्था भी रिपोर्ट का हिस्सा होगी।

दीर्घकालीन विकास की बनेगी रूपरेखा

एजेंसी की रिपोर्ट में बांधों के दीर्घकालीन संरक्षण और विकास की स्पष्ट रूपरेखा प्रस्तुत की जाएगी। इसमें जल संरक्षण, पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और स्थानीय स्तर पर आजीविका सृजन के उपाय शामिल होंगे, जिससे क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलेगी।

पर्यटन विकास की भी संभावनाएं

रिपोर्ट में बांधों को पर्यटन के दृष्टिकोण से विकसित करने के प्रस्ताव भी शामिल किए जाएंगे। बोटिंग सुविधा, ग्रीन लैंड विकास, डे और नाइट टूरिज्म जैसी योजनाओं से न केवल पर्यावरण सुधरेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

‘वंदे गंगा’ अभियान से मिली गति

वंदे गंगा’ जल संरक्षण जन अभियान के तहत मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रामगढ़ बांध के भराव क्षेत्र में सफाई और गाद हटाने के कार्य का शुभारंभ किया था। इस अभियान में जनभागीदारी बढ़ी है और प्रदेशभर में जल स्रोतों के संरक्षण व जल संग्रहण क्षमता बढ़ाने के प्रयासों को नई गति मिली है।

राज्य सरकार की यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ जल, बेहतर पर्यावरण और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

 

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