Tuesday, July 21

‘जब तक वर्क एक्सपीरियंस नहीं, विदेश में पढ़ाई के लिए न जाएं’, भारतीय छात्रों को मिली चेतावनी

 

 

विदेश में पढ़ाई भारतीय छात्रों के बीच बहुत लोकप्रिय है। अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में हर साल लाखों छात्र डिग्री लेने जाते हैं। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में दुनिया भर में 18 लाख से अधिक भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। कोविड महामारी के बाद विदेश जाने वाले छात्रों की संख्या में और भी बढ़ोतरी हुई है।

 

हालांकि, छात्रों को यह समझना जरूरी है कि विदेश जाने का सही समय कब है। कई छात्रों की शिकायत है कि वे विदेश में मास्टर्स या अन्य डिग्री लेने के बाद भी सुलभ नौकरी पाने में असफल रहते हैं।

 

सिंगापुर से एमएससी करने वाले एक छात्र ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर साझा किया कि बिना फुल-टाइम वर्क एक्सपीरियंस के विदेश नहीं जाना चाहिए। उनका कहना है कि बिना वर्क एक्सपीरियंस मास्टर्स करने वाले छात्रों को नौकरी मिलना मुश्किल होता है। उन्होंने बताया,

 

“बिना एक्सपीरियंस जॉब पाने वाले लोग बहुत कम हैं। विदेश जाने से पहले वर्क एक्सपीरियंस हासिल करें, सिर्फ इंटर्नशिप नहीं, बल्कि किसी क्षेत्र में फुल-टाइम काम करें। इससे ऐसे अवसर मिलते हैं, जो सीधे मास्टर्स करने पर नहीं मिलते।”

 

उन्होंने आगे कहा कि कई बार छात्रों की मेहनत केवल नेटवर्किंग और कॉन्टैक्ट्स पर निर्भर होती है, न कि केवल स्किल पर। इसलिए विदेश जाने से पहले कुछ साल का अनुभव हासिल करना बेहद जरूरी है।

 

विदेश में पढ़ाई से पहले फुल-टाइम वर्क एक्सपीरियंस लेने से छात्र अपने करियर की बेहतर दिशा तय कर सकते हैं और नौकरी के अवसरों में आसानी पा सकते हैं।

 

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