Tuesday, July 21

‘मेरी बेटी को बचा लो मां’: दंतेश्वरी मंदिर की दानपेटी में मिली मां की भावुक अर्जी, झड़ते बाल और ‘अदृश्य शक्ति’ का जिक्र

रायपुर/दंतेवाड़ा: छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध दंतेश्वरी मंदिर की दानपेटी इस बार न सिर्फ धन बल्कि भावनाओं की गहराई भी उजागर करती नजर आई। मंदिर समिति के अनुसार, दानपेटी से लगभग 19.44 लाख रुपए कैश निकाले गए। वहीं, दानपेटी में एक मां की दर्दभरी चिट्ठी भी मिली, जिसने देवी मां से अपनी बेटी के बिगड़ते स्वास्थ्य और मानसिक हालात के लिए प्रार्थना की है।

पत्र अनिता चंद्राकर द्वारा 20 दिसंबर 2025 को लिखा गया था, जो 28 जनवरी 2026 को दानपेटी खोलने पर सामने आया। पत्र में मां ने अपनी बेटी भूमि चंद्राकर की अचानक बिगड़ती सेहत और व्यवहार का जिक्र करते हुए देवी मां से मदद की गुहार लगाई।

पत्र में मां ने लिखी भावनाएं:
अनिता ने बताया कि उनकी बेटी पहले पढ़ाई में अच्छी थी, लेकिन 11वीं कक्षा में फेल हो गई। साथ ही उसके बाल तेजी से झड़ने लगे, खाने की आदत बदल गई और उसकी नींद व व्यवहार में भी बड़ा बदलाव आया। रात में बेटी अजीब तरह से डरकर उठती है और बुजुर्ग महिला जैसी कराह करती है। मां को आशंका है कि कोई अदृश्य शक्ति उनकी बेटी की ऊर्जा छीन रही है और उसके भाग्य को प्रभावित कर रही है।

पत्र में मां ने न सिर्फ भूमि बल्कि अपने अन्य दो बच्चों के लिए भी स्वास्थ्य, बुद्धि और सफलता की मन्नत मांगी। उन्होंने प्रार्थना की कि तीनों बच्चे हर साल 98-99 प्रतिशत अंक से उत्तीर्ण हों और उन्हें आयु, यश, कीर्ति, धन, सौभाग्य और उज्ज्वल भविष्य प्राप्त हो।

खुद के सरकारी शिक्षक बनने की मन्नत:
पत्र के अंत में महिला ने अपने जीवन की उलझनों का उल्लेख करते हुए, गणेश और शिव जी का स्मरण करते हुए मां दंतेश्वरी से अपनी बिगड़ी किस्मत संवारने और खुद को सरकारी शिक्षिका बनाने की मन्नत मांगी।

दानपेटी से और क्याक्या मिला:
मंदिर समिति के अनुसार, इस बार दानपेटी से करीब 19.44 लाख रुपए कैश निकले। इसके अलावा, कई युवाओं ने प्रेम विवाह और टूटे रिश्तों को जोड़ने की अर्ज़ियां भी माता के चरणों में रखीं।

इस प्रकार, दंतेश्वरी मंदिर की दानपेटी न केवल भक्ति और विश्वास का प्रतीक बनकर उभरी, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और आशाओं का भी सजीव दस्तावेज बन गई।

 

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