Tuesday, July 21

डॉलर बनाम BRICS ग्लोबल पेमेंट सिस्टम: भारत के नेतृत्व में 11 देशों की योजना, अमेरिकी अधिपत्य को चुनौती

BRICS देशों के वित्तीय सहयोग और डिजिटल पेमेंट प्रणाली के क्षेत्र में भारत के नेतृत्व में एक नई पहल तैयार हो रही है, जो अमेरिकी डॉलर के वैश्विक प्रभुत्व को चुनौती दे सकती है। इस प्रणाली के जरिए BRICS देशों की डिजिटल करेंसी के बीच सीधे ट्रेड सेटलमेंट की सुविधा होगी, जिससे डॉलर-आधारित SWIFT सिस्टम पर निर्भरता कम होगी।

BRICS डिजिटल पेमेंट सिस्टम की खास बातें:

  1. BRICS करेंसी का मिथक दूर
    कई लोगों की धारणा है कि BRICS ग्लोबल पेमेंट सिस्टम का मकसद BRICS करेंसी बनाना है। लेकिन भारत की यह पहल केवल एक इंटरऑपरेबल पेमेंट नेटवर्क बनाने के लिए है, न कि किसी नई ‘सुपर करेंसी’ के निर्माण के लिए। इसका उद्देश्य डॉलर या चीनी युआन पर निर्भरता को कम करना है, न कि किसी देश के प्रभुत्व को बढ़ाना।
  2. भारत की केंद्रीय भूमिका
    भारत BRICS के 11 देशों के डिजिटल करेंसी नेटवर्क को इंटरऑपरेबल बनाने का नेतृत्व कर रहा है। इसमें भारत का डिजिटल रुपया, चीन का डिजिटल युआन और रूस का डिजिटल रूबल एक नेटवर्क में जुड़े जाएंगे। इससे हर देश की करेंसी स्वतंत्र रहेगी और किसी अन्य देश की करेंसी पर निर्भरता खत्म होगी।
  3. अमेरिकी अधिपत्य को चुनौती
    BRICS डिजिटल पेमेंट सिस्टम के लागू होने से अमेरिका और पश्चिमी देशों द्वारा डॉलर को आर्थिक और कूटनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की क्षमता कमजोर होगी। SWIFT सिस्टम से बाहर होने या प्रतिबंधों के डर से कारोबार पर अब असर कम पड़ेगा।
  4. तेज, सस्ता और सुरक्षित व्यापार
    नई प्रणाली के जरिए ट्रेड सेटलमेंट तेज होगा, ट्रांजैक्शन लागत कम होगी और पश्चिमी प्रतिबंधों का जोखिम घट जाएगा। यह सिस्टम न्यूट्रल और मल्टीपोलर रहेगा, यानी किसी एक देश के प्रभुत्व में नहीं होगा।
  5. धीरेधीरे विकास की योजना
    हालांकि अभी अधिकांश CBDC पायलट स्टेज में हैं और कानूनी व तकनीकी ढांचे अलग हैं, भारत पहले द्विपक्षीय लिंक बनाएगा और फिर धीरे-धीरे इन्हें एक साझा BRICS पेमेंट नेटवर्क में जोड़ा जाएगा। भारत का UPI मॉडल इसे सफल बनाने में मार्गदर्शक साबित होगा।

नतीजा:
भारत के नेतृत्व में BRICS डिजिटल पेमेंट सिस्टम दुनिया के वित्तीय परिदृश्य में बड़ा बदलाव ला सकता है। डॉलर और अमेरिकी प्रतिबंधों का डर कम होगा और BRICS देशों को स्वतंत्र, तेज और सुरक्षित क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड की सुविधा मिलेगी। यह पहल वैश्विक वित्तीय शक्ति संतुलन को बदलने की दिशा में पहला ठोस कदम है।

 

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