Tuesday, July 21

तेल की कीमतों में 5% की गिरावट, अमेरिका-ईरान वार्ता से मिले संकेत

नई दिल्ली: कच्चे तेल की कीमतों में आज 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद कि ईरान वाशिंगटन के साथ बातचीत कर रहा है, बाजारों में सुरक्षा और स्थिरता की उम्मीदें बढ़ी हैं। इसके चलते ब्रेंट क्रूड और यूएस क्रूड दोनों ही महीनों की ऊंचाई से नीचे आ गए हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर में मजबूती ने भी तेल की कीमतों पर दबाव डाला है। डॉलर-मूल्य वाले तेल के लिए अमेरिका के बाहर के खरीदार महंगे पड़ रहे हैं। इसके अलावा, OPEC+ ने उत्पादन में कोई बदलाव नहीं किया, जिससे आपूर्ति पर्याप्त बनी हुई है।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0528 GMT पर 65.94 डॉलर प्रति बैरल और यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 61.88 डॉलर प्रति बैरल पर था।

क्या तेल की कीमतें और गिरेंगी?
विश्लेषकों का कहना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता जारी रहती है और तनाव कम रहता है तो तेल की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। मौसमी मांग कमजोर और वैश्विक आपूर्ति पर्याप्त होने के कारण कीमतें फिलहाल स्थिर नहीं हैं। हालांकि, यदि वार्ता टूटती है या आपूर्ति में बाधा आती है तो तेल की कीमतें फिर से बढ़ सकती हैं।

भारत पर प्रभाव
तेल की गिरती कीमतों का भारत पर सीधा असर पड़ सकता है। भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदना कम कर दिया है और अमेरिका से आयात बढ़ा लिया है। कीमतों में गिरावट से भारत को कुछ राहत मिलेगी, लेकिन मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण यह राहत पूरी तरह संतुलित नहीं होगी।

निष्कर्ष
अमेरिका-ईरान संबंधों में सुधार की उम्मीद और कमोडिटी बाजारों में नरमी के चलते कच्चे तेल की कीमतें गिर गई हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए यह मिश्रित संकेत हैं: कुछ राहत जरूर मिलेगी, लेकिन डॉलर की मजबूती सतर्क रहने की वजह है।

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