Tuesday, July 21

यूरोप के बाद अमेरिका से भी भारत की ट्रेड डील, बांग्लादेश की कपड़ा इंडस्ट्री पर संकट

नई दिल्ली/ढाका: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हाल ही में हुए व्यापार समझौते के बाद भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों में नया अध्याय शुरू हो गया है। इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है।

यह भारत के लिए दो हफ्ते में दूसरा बड़ा व्यापारिक मास्टरस्ट्रोक है। वहीं, पड़ोसी देशों बांग्लादेश और पाकिस्तान के लिए यह गंभीर चुनौती बन गया है। अमेरिका ने बांग्लादेशी उत्पादों पर 20 प्रतिशत और पाकिस्तान के उत्पादों पर 19 प्रतिशत टैरिफ लगाए हुए हैं।

अमेरिका के साथ इस नए समझौते के तहत भारत ने रूस से तेल की खरीद बंद करने और व्यापार बाधाओं को कम करने का वचन दिया है। इसके फलस्वरूप अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद अब पड़ोसी देशों के मुकाबले कम कीमत पर उपलब्ध होंगे। खासकर कपड़ा उद्योग में बांग्लादेश के लिए यह बड़ी चुनौती साबित होगी।

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार और नोबेल विजेता मोहम्मद यूनुस पहले ही भारत पर लगाए गए टैरिफ को लेकर मजाक उड़ा चुके हैं। यूरोपीय संघ के साथ भारत की हालिया व्यापार डील के बाद यूनुस ने भारतीय उत्पादों के बढ़ते प्रभाव की चिंता व्यक्त की थी।

बांग्लादेश टेक्सटाइल एसोसिएशन ने हाल ही में कपड़ा उद्योग की परेशानियों को देखते हुए 1 फरवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की थी। हालांकि नई सरकार के गठन के बाद इस हड़ताल पर फिलहाल स्थगन लगा दिया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोप और अमेरिका के बाजार में भारत के उत्पाद अब बांग्लादेश और अन्य पड़ोसी देशों के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे। इससे बांग्लादेशी निर्यातकों को अमेरिकी और यूरोपीय बाजार में अपने उत्पादों की कीमत और गुणवत्ता दोनों पर ध्यान केंद्रित करना पड़ेगा।

विशेष रूप से यूरोपीय यूनियन के ईबीए (EBA) स्कीम के तहत बांग्लादेश को अब तक ड्यूटी फ्री एक्सेस था, जबकि भारतीय उत्पादों पर 10-12 प्रतिशत टैरिफ लागू था। भारत के साथ यूरोप और अमेरिका के व्यापार समझौतों के बाद बांग्लादेश की निर्यात प्रतिस्पर्धा में कठिनाई आने की संभावना जताई जा रही है।

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