Tuesday, July 21

सिंधु जल संधि विवाद: भारत ने आर्बिट्रेशन कोर्ट का समन ठुकराया, पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ीं

भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty – IWT) विवाद एक बार फिर तीव्र हो गया है। भारत ने इस मामले में हेग स्थित परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (PCA) के आदेशों का पालन करने से साफ इनकार कर दिया है।

पिछले साल से ही दोनों देशों के बीच इस संधि को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। पाकिस्तान ने PCA के समन के माध्यम से भारत से कश्मीर के किशनगंगा और रातले हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट से संबंधित संवेदनशील ऑपरेशनल डेटा और रिकॉर्ड मांगने की कोशिश की थी। भारत ने इसे पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि वह इस ट्रिब्यूनल को गैर-कानूनी मानता है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत ने ट्रिब्यूनल को औपचारिक रूप से सूचित कर दिया है कि वह न तो इसके आदेशों का पालन करेगा और न ही किसी कार्यवाही में भाग लेगा। भारत का कहना है कि न्यूट्रल एक्सपर्ट प्रोसेस के साथ समानांतर आर्बिट्रेशन कोर्ट का गठन सिंधु संधि के विवाद समाधान ढांचे का उल्लंघन है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारत की सुरक्षा चिंताओं के समाधान और पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद के समर्थन के बंद होने तक भारत किसी भी संधि दायित्व, जैसे हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझा करना या मध्यस्थता में भाग लेना, के लिए बाध्य नहीं है।

पाकिस्तान ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक ले जाकर गंभीर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान ने भारत के इस कदम को “युद्ध की गीदड़भभकी” बताया है और इसे अक्ट ऑफ वॉर करार दिया है।

सिंधु संधि 1960 में दोनों देशों के बीच हुई थी और यह सिंधु बेसिन की छह नदियों के पानी का बंटवारा तय करती है। भारत के इस कदम से पाकिस्तान के सामने जल संकट की संभावना बढ़ गई है और क्षेत्रीय तनाव को भी हवा मिल सकती है।

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