Tuesday, July 21

टॉक्सिक रिश्ते, दोस्ती में धोखा और पेरेंट्स का साया खोया, फिर भी नहीं टूटी गुलफाम खान की हिम्मत

टीवी इंडस्ट्री की जानी-मानी अभिनेत्री गुलफाम खान ने पर्दे पर जितने सशक्त किरदार निभाए हैं, उतनी ही मजबूत उनकी निजी जिंदगी की कहानी भी है। कम उम्र में माता-पिता को खोने का दर्द, प्यार में टॉक्सिक रिश्ता, दोस्तों से मिला धोखा और 27 साल की उम्र में गंभीर बीमारी—गुलफाम की जिंदगी संघर्षों से भरी रही। लेकिन इन तमाम मुश्किलों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और मजबूती से आगे बढ़ती रहीं।

‘मेरी कहानी’ सीरीज में आज हम आपको रूबरू करा रहे हैं उस अदाकारा से, जिसने हालातों के आगे झुकने के बजाय उन्हें अपनी ताकत बना लिया।

जिंदगी ने सिखाया लड़ना

गुलफाम खान कहती हैं कि जिंदगी ने उन्हें कभी आसान रास्ता नहीं दिया, लेकिन हर मुश्किल ने उन्हें और मजबूत बनाया। माता-पिता के जाने के बाद उन्होंने पहली बार महसूस किया कि अगर वह उनके बिना जी सकती हैं, तो दुनिया की कोई भी परेशानी उन्हें तोड़ नहीं सकती। टॉक्सिक रिश्ते और दोस्ती में मिले धोखे के बावजूद उन्होंने खुद पर भरोसा बनाए रखा और आगे बढ़ने का रास्ता चुना।

दिल से आज भी जवान हूं

गुलफाम मानती हैं कि उम्र सिर्फ एक नंबर है। उनका कहना है कि पहले की पीढ़ी मेहनत से डरती नहीं थी और आज भी वह अपने काम को लेकर उतनी ही संजीदा हैं। वह रोज़ खुद के लिए एक घंटा निकालती हैं, जिसे वह अपना ‘मी टाइम’ कहती हैं। इस दौरान योग, डांस, बैडमिंटन, ब्रिस्क वॉक जैसी गतिविधियां उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से फिट रखती हैं।

बीमारी से नहीं मानी हार

27 साल की उम्र में गुलफाम को प्रीमैच्योर आर्थराइटिस हो गया था। डॉक्टरों ने कहा था कि यह बीमारी पूरी तरह ठीक नहीं होती, लेकिन गुलफाम ने इसे मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने फिजियोथेरेपी, एक्सरसाइज और जिम के जरिए अपने दर्द को काफी हद तक काबू में किया और बीमारी को अपनी जिंदगी पर हावी नहीं होने दिया।

उम्र से डर नहीं लगता

40 के बाद शरीर में आने वाले हार्मोनल बदलावों को गुलफाम ने सहजता से स्वीकार किया। मेटाबॉलिज्म धीमा हुआ, वजन बढ़ा, लेकिन उन्होंने डरने के बजाय अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव किया। डाइट पर ध्यान दिया, फिजिकल एक्टिविटी बढ़ाई और खुद को उम्र के साथ ढालना सीख लिया।

किताबें हैं सबसे अच्छी दोस्त

गुलफाम खान के लिए किताबें सिर्फ पढ़ने का जरिया नहीं, बल्कि सच्ची दोस्त हैं। उनका मानना है कि किताबों से बेहतर कोई साथी नहीं। पढ़ना और पेंटिंग करना उनके लिए मेडिटेशन जैसा है, जिसमें वह अपनी सारी परेशानियां भूलकर खुद की दुनिया में खो जाती हैं।

संघर्ष, साहस और आत्मविश्वास—गुलफाम खान की कहानी उन तमाम लोगों के लिए प्रेरणा है, जो मुश्किल हालातों में भी जिंदगी से हार मानने के बजाय आगे बढ़ने का हौसला रखते हैं।

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