Tuesday, July 21

भारत ने इतिहास रचा: एक साल में 5 बड़ी ट्रेड डील, वैश्विक GDP में 50% से अधिक हिस्सेदारी

नई दिल्ली: भारत ने अपने आर्थिक इतिहास में एक नया मुकाम स्थापित किया है। देश ने 2025–26 के वित्तीय वर्ष में कुल पांच बड़े व्यापारिक समझौते पूरे किए, जिनकी वैश्विक GDP में हिस्सेदारी 50% से अधिक है। सबसे हालिया और ऐतिहासिक समझौता अमेरिका के साथ हुआ है, जो दोनों देशों के बीच पिछले कुछ महीनों से तनाव का प्रमुख कारण बना हुआ था।

अमेरिका के साथ ऐतिहासिक ट्रेड डील

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर चर्चा के बाद भारतीय सामानों पर लगने वाले टैरिफ को 25% से घटाकर 18% कर दिया। इसके अलावा, अमेरिका ने रूस से तेल पर लगाया गया अतिरिक्त 25% टैरिफ भी हटा दिया।

भारत–अमेरिका व्यापार का आंकड़ा:

  • भारत का कुल निर्यात: लगभग 20% अमेरिका को

  • भारत का आयात: अमेरिका की हिस्सेदारी 6.3%

  • दोनों देशों का वर्तमान व्यापार: $191 अरब, लक्ष्य: 2030 तक $500 अरब

एक साल में पांचवीं ट्रेड डील

अमेरिका और यूरोपियन यूनियन के अलावा, भारत ने इस साल ब्रिटेन, ओमान और न्यूजीलैंड के साथ भी व्यापार समझौते किए। यूरोपियन यूनियन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के बाद यह भारत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है।

वैश्विक GDP में 50% से अधिक हिस्सेदारी

2025 के वैश्विक GDP के हिसाब से भारत, अमेरिका, यूरोपियन यूनियन (27 देश), ब्रिटेन, ओमान और न्यूजीलैंड मिलाकर वैश्विक GDP का 50–55% हिस्सा बनाते हैं। अकेले भारत और यूरोपियन यूनियन का हिस्सा लगभग 25% है।

अमेरिका से हुई डील के बाद अब बांग्लादेश (20%), वियतनाम (20%) और थाईलैंड (19%) पर अमेरिकी टैरिफ भारत से अधिक हो गया है।

ग्लोबल ट्रेड में भारत की बढ़ती भागीदारी

  • अमेरिका: दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

  • यूरोपियन यूनियन: दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्था

  • भारत: चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

इन प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ भारत का जुड़ाव अब वैश्विक व्यापार में 38–40% हिस्सेदारी के बराबर है।

कई देशों के साथ पहले से व्यापार संधि

इसके अलावा, भारत के पास जापान, दक्षिण कोरिया, आसियान क्षेत्र के देश, SAARC, मॉरीशस, UAE और ऑस्ट्रेलिया के साथ पहले से ही फ्री ट्रेड एग्रीमेंट और रीजनल ट्रेड एग्रीमेंट चल रहे हैं।

निष्कर्ष:
भारत की यह उपलब्धि न केवल वैश्विक व्यापार में उसकी ताकत को दर्शाती है, बल्कि इसे दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक निर्णायक आर्थिक खिलाड़ी के रूप में स्थापित करती है।

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