Tuesday, July 21

‘तो भारत छोड़ दें’: निजता के अधिकार के उल्लंघण पर CJI सूर्यकांत ने व्हाट्सएप को लगाई कड़ी फटकार

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को व्हाट्सएप और इसकी पेरेंट कंपनी मेटा को नागरिकों की निजता के अधिकारों के उल्लंघन को लेकर कड़ी फटकार लगाई और चेतावनी दी कि “अगर हमारे कानून का पालन नहीं कर सकते तो भारत छोड़ दें।”

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि टेक्नोलॉजी या बिजनेस प्रक्रिया के नाम पर नागरिकों की निजता से समझौता नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह टिप्पणी व्हाट्सएप और मेटा द्वारा नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के पिछले साल के फैसले को चुनौती देने के मामले में की। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस मामले में पार्टी बनाते हुए 9 फरवरी को अंतरिम आदेश जारी करने का निर्देश दिया।

‘निजता के अधिकार के साथ नहीं खेल सकते’
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “डेटा शेयरिंग के नाम पर आप इस देश के नागरिकों के निजता के अधिकार के साथ नहीं खेल सकते। अगर आप संविधान का पालन नहीं कर सकते तो भारत छोड़ दें।” कोर्ट ने मेटा के यूजर कंसेंट और ऑप्ट-आउट तंत्र पर भी सवाल उठाए और इसे “निजी जानकारी चुराने का आसान तरीका” करार दिया।

व्हाट्सएप पर 213 करोड़ रुपये जुर्माना
मामला व्हाट्सएप की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी अपडेट से जुड़ा है। पिछले साल नवंबर में NCLAT ने कम्पिटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) द्वारा लगाए गए 213.14 करोड़ रुपये जुर्माने को सही ठहराया था। जुर्माना कंपनी पर बाजार में प्रभुत्व का फायदा उठाते हुए पॉलिसी में बदलाव करने को लेकर लगाया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के निजता नियम इतने चालाकी से बनाए जाते हैं कि आम नागरिक समझ नहीं पाते, और ऑप्ट-आउट विकल्प को दिखावटी बताया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यूजर की सहमति के नाम पर डेटा शेयरिंग को उचित नहीं ठहराया जा सकता।

सुनवाई 9 फरवरी को होगी, जब इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) को भी मामले में शामिल किया जाएगा और अंतरिम आदेश जारी किया जाएगा।

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