Tuesday, July 21

यहीं पढ़ी, नौकरी भी थी, फिर भी अमेरिका छोड़ रही हूं… H-1B वीजा के खेल से निराश भारतीय वर्कर

अमेरिका में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों और पेशेवरों की एक बड़ी इच्छा होती है कि पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हें अमेरिका में आराम से नौकरी भी मिले। इसके लिए H-1B वीजा जरूरी होता है। लेकिन इस वीजा को पाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है, और इसका खेल कई भारतीय वर्कर्स को निराश कर रहा है।

सुनजना रमना, AI इंजीनियर और कोलंबिया यूनिवर्सिटी की पूर्व छात्रा, इसी वजह से अमेरिका छोड़ने का फैसला कर रही हैं। सुनजना का कहना है कि यह निर्णय उन्होंने इसलिए लिया, क्योंकि अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम की जटिलताओं के चलते उनके पास और कोई विकल्प नहीं बचा। उनके पास लाखों रुपये की जॉब ऑफर भी थी, लेकिन इसके बावजूद H-1B वीजा न मिल पाने की निराशा ने उन्हें वापस लौटने पर मजबूर किया।

सब कुछ सही किया, फिर भी निराशा मिली
सुनजना ने लिंक्डइन पर साझा किया कि उन्होंने अमेरिका में सफल रहने के लिए वह सब कुछ किया, जो सही माना जाता है – आईवी लीग यूनिवर्सिटी से पढ़ाई, टेक सेक्टर में लाखों की जॉब, स्टूडेंट लोन चुकाना, ग्लोबल मंचों पर बोलना और SaaS प्रोडक्ट बेचना। बावजूद इसके उन्हें H-1B वीजा तीन बार अप्लाई करने के बाद भी नहीं मिला। सुनजना कहती हैं, “आप सब कुछ सही कर सकते हैं, लेकिन नतीजे पर आपका कोई कंट्रोल नहीं होता।”

H-1B वीजा क्या है?
H-1B वीजा अमेरिका में कंपनियों को विशेष क्षेत्रों में काम करने के लिए विदेशी वर्कर्स को हायर करने की इजाजत देता है। हर साल केवल 65 हजार वीजा जारी होते हैं और यह लॉटरी सिस्टम के माध्यम से होता है। किसी कंपनी से जॉब ऑफर मिलने के बाद ही वर्कर की ओर से वीजा याचिका दायर की जाती है। आलोचकों का कहना है कि लॉटरी सिस्टम के कारण कई योग्य और प्रतिभाशाली वर्कर्स को वीजा नहीं मिल पाता।

सुनजना की कहानी उन हजारों भारतीयों का आईना है, जो अमेरिकी ड्रीम को पाने की कोशिश में बार-बार निराश होते हैं और अंततः लौटने को मजबूर होते हैं।

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