Tuesday, July 21

EPFO की तरह होंगे प्राइवेट PF ट्रस्टों के नियम, कनफ्यूजन और मुकदमों में कमी आएगी

नई दिल्ली: अब बड़ी कंपनियों द्वारा अपने कर्मचारियों के प्रोविडेंट फंड (PF) को मैनेज करने वाले प्राइवेट ट्रस्ट, यानी Exempted Trust, के नियम भी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की तरह होंगे। बजट 2026-27 में इस सुधार का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे प्राइवेट PF ट्रस्टों और EPFO के नियमों में तालमेल आएगा और कर्मचारियों व नियोक्ताओं के लिए पारदर्शिता बढ़ेगी।

क्या है बदलाव:
अभी तक प्राइवेट PF ट्रस्टों को टैक्स छूट मिलने की शर्तें और निवेश के तरीके EPFO के नियमों से अलग थे। कंपनी (एम्प्लॉयर) द्वारा किए जाने वाले योगदान की सीमा भी दोनों कानूनों में समान नहीं थी। नए प्रस्ताव के अनुसार:

  • मान्यता-प्राप्त PF ट्रस्ट अब EPF एक्ट, 1952 की धारा 17 और आयकर अधिनियम, 2025 की अनुसूची XI के अनुरूप काम करेंगे।

  • निवेश के नियम EPFO के समान होंगे।

  • सरकारी प्रतिभूतियों में 50% निवेश की अनिवार्य सीमा हटा दी गई है।

  • नियोक्ता के योगदान पर मौद्रिक सीमा अब 7.5 लाख रुपये प्रति वर्ष होगी; इससे अधिक अंशदान पर कर लगेगा।

फायदे:
EPFO ने कहा है कि यह कदम नियमों में तालमेल और स्पष्टता लाएगा, जिससे कर्मचारियों और नियोक्ताओं के बीच अनावश्यक विवाद और मुकदमों में कमी आएगी। इस सुधार से निजी PF ट्रस्टों को मान्यता प्राप्त करना सरल और पारदर्शी हो जाएगा।

पारदर्शिता और निवेश में सुविधा:
नए नियम निवेश मानदंडों को EPFO ढांचे के अनुरूप करेंगे। इससे ट्रस्टों के संचालन में भ्रम की स्थिति खत्म होगी और कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

निष्कर्ष:
केंद्रीय बजट 2026-27 के इस प्रस्ताव से PF ट्रस्टों के नियमों में एकरूपता आएगी और नियोक्ताओं व कर्मचारियों के लिए प्रक्रिया सरल और लाभकारी होगी। अब निजी PF ट्रस्ट भी EPFO की तरह मानकीकृत ढांचे में काम करेंगे, जिससे कर्मचारी भविष्य निधि प्रणाली में विश्वास और स्थिरता बढ़ेगी।

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