Tuesday, July 21

बीकानेर में खेजड़ी बचाने की मांग पर अनिश्चितकालीन अनशन, तीसरे दिन भी जारी

बीकानेर में खेजड़ी वृक्षों को बचाने के लिए चल रहे अनिश्चितकालीन अनशन का तीसरा दिन भी जारी है। कड़ाके की सर्दी और मुश्किल मौसम के बावजूद आंदोलनकारियों का संकल्प अडिग है। बिश्नोई धर्मशाला के सामने इस मुहिम में 450 से अधिक पर्यावरण प्रेमी और संत, जिनमें 50 से ज्यादा महिलाएं शामिल हैं, लगातार धरने पर बैठे हुए हैं।

आंदोलन में शामिल लोगों ने किसी भी समझौते से साफ इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि जब तक खेजड़ी वृक्षों की सुरक्षा के लिए ठोस और लिखित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक अनशन समाप्त नहीं किया जाएगा। आंदोलनकारियों का मानना है कि यह संघर्ष केवल पेड़ों के लिए नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए है। मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी आंदोलन में समर्थन देने का संकल्प व्यक्त किया।

महेंद्रकुमार ने आंखों पर पट्टी बांधकर अनशन की शपथ ली
अनशन स्थल पर महेंद्रकुमार ने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली है और घोषणा की है कि जब तक उनकी मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं होता, वह पट्टी नहीं हटाएंगे। उनका यह कदम आंदोलन की गंभीरता और संकल्प को दर्शाता है। आंदोलन में निरमा बिश्नोई सहित कई महिलाएं भी लगातार धरने पर हैं।

भारी पुलिस बल की तैनाती, रेंज आई की मौजूदगी
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। मौके पर 200 से अधिक पुलिसकर्मी, आरएसी और एसटीएफ के जवान तैनात किए गए हैं। बीकानेर रेंज के आईजी हेमंत शर्मा भी अनशन स्थल पर मौजूद हैं।

आंदोलन के नेतृत्वकर्ताओं ने साफ कहा है कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा। उन्होंने दोहराया कि जब तक खेजड़ी वृक्षों की सुरक्षा पर अंतिम और ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, अनशन जारी रहेगा।

महेंद्रकुमार, आंदोलनकारी एवं पर्यावरण कार्यकर्ता ने कहा, “खेजड़ी केवल पेड़ नहीं, हमारी संस्कृति और पर्यावरण की पहचान है, इसके संरक्षण तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा।”

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