Tuesday, July 21

ममता बनर्जी ने SIR पर चुनाव आयोग को दी चुनौती, सुप्रीम कोर्ट में दलील, दिल्ली में बनी फाइटर छवि

कोलकाता/दिल्ली: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग को चुनौती दी है। टीएमसी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया। ममता बनर्जी ने अपनी दलील में पश्चिम बंगाल में जारी नोटिस और एसआईआर के दायरे में आए मतदाताओं के मुद्दों का जिक्र किया।

एसआईआर के विरोध को लेकर ममता बनर्जी ने दिल्ली में अपने तेवर साफ कर दिए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग को वॉट्सऐप आयोग बताकर आलोचना की और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग की मांग भी उठाई। सुप्रीम कोर्ट में दलील के दौरान उनके साथ एसआईआर से प्रभावित लोगों का प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद था।

जुझारू और संघर्षशील छवि
ममता बनर्जी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत से ही संघर्षशील और जुझारू नेता के रूप में पहचान बनाई है। 1993 में ‘राइटर्स चलो’ अभियान, 2005 का सिंगूर आंदोलन और 2007 का नंदीग्राम आंदोलन उन्हें रोड फाइटर की छवि देने वाले प्रमुख उदाहरण हैं। 2000 में केंद्र में रेल मंत्री रहते हुए उन्होंने तेल की कीमतों के मुद्दे पर अपनी ही सरकार को घेरा और इस्तीफा दे दिया।

2026 चुनाव में रणनीति
वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को एंटी-इम्कबेंसी माहौल का सामना करना है। बीते 15 साल में शासक रही ममता पर विपक्षी बीजेपी ने भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और संदेशखाली जैसे मुद्दों से दबाव बनाया है। इस चुनौती का सामना करने के लिए ममता ने एसआईआर के विरोध को अपनी रणनीति का हिस्सा बनाया और अपनी संघर्षशील नेता की छवि जनता के बीच प्रस्तुत की।

चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि अगर ममता बनर्जी एसआईआर मुद्दे को चुनाव तक सक्रिय रखती हैं, तो यह एंटी-इम्कबेंसी माहौल को पीछे धकेलने में मददगार साबित हो सकता है।

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