Tuesday, July 21

नीट छात्रा मौत मामला, सृजन और शेल्टर कांड पर घिरेगी सरकार: सीबीआई जांच पर विपक्ष का अविश्वास

पटना: बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विपक्ष ने सरकार को घेरने की व्यापक रणनीति तैयार कर ली है। पटना के छात्रावास में रहकर नीट परीक्षा की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत, सृजन घोटाला और मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड को लेकर विपक्ष सदन से सड़क तक आंदोलन की तैयारी में है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने संकेत दिए हैं कि इन मामलों में न्याय और शासन की विश्वसनीयता बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनने जा रही है।

बजट सत्र के पहले दिन मीडिया से बातचीत में तेजस्वी यादव ने नीट छात्रा प्रकरण का उल्लेख करते हुए राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मामला सीबीआई को सौंपे जाने के बावजूद पीड़ित परिवार को न्याय मिलने पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने सृजन घोटाला और मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि पूर्व मामलों में न्याय प्रक्रिया की धीमी गति ने जनता का विश्वास कमजोर किया है।

राष्ट्रीय जनता दल और महागठबंधन के सहयोगी दलों ने इन मुद्दों पर संयुक्त रणनीति बनाई है। विपक्ष का आरोप है कि सीबीआई जांच के नाम पर संवेदनशील मामलों को ठंडे बस्ते में डाला जा रहा है। सदन के भीतर इन मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी है, जबकि बाहर जनांदोलन की रूपरेखा भी बनाई जा रही है।

क्या है सृजन घोटाला?

सृजन घोटाला लगभग 780 करोड़ रुपये की सरकारी राशि के दुरुपयोग से जुड़ा मामला है। आरोप है कि सरकारी धन को फर्जी तरीके से एक स्वयंसेवी संस्था के खातों में ट्रांसफर किया गया। इस मामले की मॉनिटरिंग सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग विपक्ष लंबे समय से करता रहा है। घोटाले में कई सरकारी अधिकारी, बैंक कर्मी और प्रभावशाली व्यक्तियों की भूमिका की जांच हुई है। विपक्ष का आरोप है कि राजनीतिक संरक्षण के कारण जांच प्रभावित हुई।

मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड

मुजफ्फरपुर स्थित आश्रय गृह में बालिकाओं के यौन शोषण का मामला 2018 में सामने आया था, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था। मेडिकल जांच में कई पीड़िताओं के साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी। इस मामले में दर्ज एफआईआर, लापता बालिकाओं और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर अब भी सवाल उठते रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन मामलों में न्यायिक प्रक्रिया में देरी ने सरकार की छवि पर असर डाला है। विश्लेषक राम बंधु वत्स कहते हैं कि जांच की धीमी रफ्तार से अविश्वास की स्थिति बनी है और विपक्ष इसे बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में भुनाने की कोशिश करेगा। उनके अनुसार यह सरकार के लिए “लिटमस टेस्ट” साबित हो सकता है कि वह निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित कर पाती है या नहीं।

बजट सत्र के दौरान इन संवेदनशील मुद्दों पर तीखी बहस के संकेत मिल रहे हैं। आने वाले दिनों में सदन का माहौल गर्म रहने की पूरी संभावना है।

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