Tuesday, July 21

गाजियाबाद: बच्चों में बढ़ रहा डिजिटल एडिक्शन, नोएडा जिला अस्पताल के आंकड़े दहला रहे हैं

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में हालिया सुसाइड केस ने एक बार फिर समाज और अभिभावकों को झकझोर कर रख दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि कम उम्र में बच्चों का बढ़ता डिजिटल एडिक्शन और कामकाजी माता-पिता द्वारा पर्याप्त समय न मिलने की वजह से बच्चों की मानसिक सेहत कमजोर हो रही है।

जानकारी के अनुसार, नोएडा के जिला अस्पताल में हर सप्ताह औसतन तीन से पांच बच्चे और किशोर डिजिटल एडिक्शन की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या 14 से 19 वर्ष के किशोरों की है।

जिला अस्पताल की मनोवैज्ञानिक डॉ. स्वाति त्यागी ने बताया कि मोबाइल गेमिंग और लंबे समय तक स्क्रीन पर समय बिताने की आदत बच्चों को पढ़ाई, परिवार और सामाजिक जीवन से धीरे-धीरे काट रही है। इसका असर उनके व्यवहार, नींद और मानसिक स्वास्थ्य पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।

मनोचिकित्सक डॉ. आकांक्षा अरोड़ा का कहना है कि बच्चों को केवल डांटने या रोकने से समस्या हल नहीं होती। उन्हें समझने की जरूरत है कि वे क्यों डिजिटल दुनिया की ओर भाग रहे हैं। अभिभावकों को बच्चों के साथ मिलकर दिन में स्क्रीन समय तय करना चाहिए और बातचीत बढ़ानी चाहिए।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि माता-पिता बच्चों की रुचियों को समझें और उनमें सक्रिय रूप से भाग लें। चाहे वह चित्रकारी, संगीत, किताबें या खेल हों, बच्चों के साथ समय बिताना उनके आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। घर में कुछ जगहों और समय को ‘नो मोबाइल जोन’ बनाया जा सकता है, जैसे डाइनिंग टेबल, बेडरूम या स्टडी टाइम।

विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते बच्चों की मानसिक स्थिति पर ध्यान दिया जाए और उनसे संवाद बढ़ाया जाए तो डिजिटल एडिक्शन जैसी समस्या को गंभीर रूप लेने से रोका जा सकता है

This slideshow requires JavaScript.

Leave a Reply

This slideshow requires JavaScript.