Tuesday, July 21

भारत और रूस के बीच न्यूक्लियर ऊर्जा सहयोग को लेकर चल रही बातचीत पर सरकार ने संसद में दी जानकारी

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने लोकसभा में स्पष्ट किया है कि परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) और रूस की ROSATOM एजेंसी के बीच न्यूक्लियर ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के लिए नियमित रूप से बातचीत जारी है। इसमें बड़े पैमाने के न्यूक्लियर पावर प्लांट और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) शामिल हैं। हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई फाइनल डील नहीं हुई है। यह जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 4 फरवरी 2026 को संसद में दी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि न्यूक्लियर पावर प्लांट के सभी चरणों में सुरक्षा सर्वोपरि है। सभी प्लांट केवल एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड (AERB) द्वारा स्टेज-वाइज मंजूरी मिलने के बाद ही लगाए जाते हैं।

उन्होंने आगे बताया कि जमीन अधिग्रहण और पर्यावरणीय मंजूरी के लिए RFCTLARR एक्ट और MoEF&CC के तहत सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (SIA & EIA) रिपोर्ट के आधार पर सार्वजनिक सुनवाई और फॉर्मल स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन किया जाता है। इसके साथ ही अलग-अलग स्टेकहोल्डरों तक पहुँचने और जागरूकता फैलाने के लिए बड़े पैमाने पर पब्लिक अवेयरनेस प्रोग्राम भी चलाए जाते हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि DAE के तहत NPCIL में प्रभावित लोगों के लिए उम्र और मार्क्स में छूट, योग्य स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता, और कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) गतिविधियों के तहत स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम, छात्रवृत्ति और उच्च शिक्षा के लिए स्पॉन्सरशिप जैसी विशेष योजनाएं लागू की जाती हैं।

सरकार मौजूदा ऑपरेटिंग साइट्स के अलावा नई साइट्स के आसपास भी समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठा रही है। NPCIL द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वच्छता क्षेत्रों में विभिन्न सामाजिक कल्याण योजनाओं के माध्यम से स्थानीय आबादी को लाभ पहुँचाया जा रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि सरकार न्यूक्लियर ऊर्जा के क्षेत्र में सुरक्षा, पारदर्शिता और स्थानीय विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।

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