Tuesday, July 21

विवाहित महिला शादी के झूठे वादे पर नहीं लगा सकती रेप का आरोप: सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि विवाहित महिला शादी के झूठे वादे पर किसी पुरुष के खिलाफ रेप का मामला दर्ज नहीं करा सकती। अदालत ने यह टिप्पणी उस केस में दी, जिसमें एक महिला वकील ने एक अन्य वकील पर शादी का झूठा वादा करके यौन संबंध बनाने और उसके आधार पर रेप का आरोप लगाने का मामला दायर किया था।

कोर्ट का तर्क
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने कहा कि यदि कोई महिला पहले से शादीशुदा है, तो वह कानूनी रूप से दूसरी शादी के लिए योग्य नहीं होती। ऐसे में शादी के झूठे वादे के आधार पर यौन संबंध बनाने को कानूनी दृष्टि से रेप नहीं माना जा सकता। अदालत ने इस मामले को “सहमति से बने रिश्ते के कटुतापूर्ण रूप” के उदाहरण के रूप में बताया।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि महिला ने पहले से शादीशुदा होने के बावजूद यौन संबंध बनाए, तो उसका यह दावा कि शादी का झूठा वादा किया गया था, कानूनी रूप से लागू नहीं होगा। हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 5(i) के अनुसार, किसी व्यक्ति का पहले से जीवित जीवनसाथी होने पर दूसरी शादी मान्य नहीं होती।

अदालतों को बरतनी होगी सावधानी
कोर्ट ने कहा कि अदालतों को रेप के वास्तविक मामलों की पहचान में बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। कानून का दुरुपयोग बढ़ रहा है, इसलिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि रेप के सभी आवश्यक तत्व मौजूद हों

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि शादी के झूठे वादे पर रेप का आरोप नहीं चल सकता, और कानून का दुरुपयोग रोकने के लिए न्यायालय सतर्क रहेगी।

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