Tuesday, July 21

भोपाल के स्कूलों में नियमों की उड़ रही धज्जियां, मोबाइल गेमिंग और तनाव के बढ़ते मामले चिंताजनक

भोपाल: राजधानी के कई बड़े स्कूल CBSE के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। छात्रों की मानसिक सेहत और बढ़ते ऑनलाइन गेमिंग व स्क्रीन टाइम के खतरे को देखते हुए, फुल-टाइम काउंसलर की अनुपस्थिति कई माता-पिता और अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बन गई है।

PTA ने किया शिक्षा विभाग को पत्र

पेरेंट्स-टीचर्स एसोसिएशन (PTA) ने शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर सख्त ऑडिट और जुर्माने की मांग की है। PTA के महासचिव प्रबोध पंड्या ने कहा कि बिना काउंसलर के छात्र और अभिभावक ऑनलाइन गेमिंग की लत, एंग्जायटी और आपसी तनाव जैसी समस्याओं का सामना अकेले कर रहे हैं। उनका कहना है, “बच्चे घंटों मोबाइल से चिपके रहते हैं। इससे पढ़ाई पर असर पड़ता है, चिंता बढ़ती है और घर के माहौल में तनाव आता है।”

CBSE नियम और स्कूलों की लापरवाही

CBSE का नियम 2017 से लागू है, जिसमें कहा गया है कि हर स्कूल में कम से कम एक फुल-टाइम काउंसलर होना चाहिए। काउंसलर बच्चों के तनाव, साइबर लत और आपसी झगड़ों को सुलझाने में मदद करता है। लेकिन भोपाल के कई स्कूल बजट की कमी या आउटसोर्सिंग के कारण इस नियम का पालन नहीं कर रहे हैं।

माता-पिता और PTA की अपील

PTA ने माता-पिता से अपील की है कि वे स्कूलों का ऑडिट कराएं, नियमों का पालन न करने पर जुर्माना लगवाएं और स्कूलों को जवाबदेह बनाएं। PTA का कहना है कि बच्चों के भविष्य और मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए यह कदम आज के डिजिटल युग में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

चेतावनी: गाजियाबाद जैसी घटनाएं होंगी दोहराई

उल्लेखनीय है कि हाल ही में गाजियाबाद में तीन सगी बहनों ने 9वीं मंजिल से गिरकर आत्महत्या कर ली थी, जिसमें सुसाइड नोट में मोबाइल गेमिंग का एंगल सामने आया था।

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