Tuesday, July 21

हरदा फैक्ट्री ब्लास्ट: 2 साल बाद भी ’14वें पीड़ित’ की तलाश, परिवार झूल रहा इंसाफ और अनिश्चितता के बीच

हरदा: दो साल पहले हरदा की एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट में 13 लोगों की मौत हो गई थी और 200 से ज़्यादा लोग घायल हुए। लेकिन आज भी 30 वर्षीय कैलाश खापरे का परिवार अनिश्चितता में जी रहा है। मलबे में लापता कैलाश न तो मृत घोषित किए गए हैं, न ही जीवित मिले। इस कारण उनके तीन मासूम बच्चे और बुजुर्ग माता-पिता अब तक किसी सरकारी मुआवजे या सहायता से वंचित हैं।

मृत्यु या जीवित—कुछ पता नहीं:
कैलाश के माता-पिता जमुना और राजू खापरे अपने बेटे के लौटने की उम्मीद में जी रहे हैं। उनके तीन छोटे बच्चे, उम्र 3, 4 और 5 साल, दादा-दादी के साथ रह रहे हैं। राजू खापरे ने कहा, “कभी-कभी लगता है कि वह वापस आएगा, कभी डर लगता है कि शायद कभी नहीं। तीन महीने पहले ही वह हरदा काम के लिए गए थे और अब तक कोई सुराग नहीं मिला।”

कानूनी पेंच और मुआवजा:
जिस 13 श्रमिकों की मौत की पुष्टि हुई, उनके परिवारों को 21.5 लाख रुपये का मुआवजा मिल चुका है। लेकिन कैलाश का परिवार अभी तक किसी भी सहायता से वंचित है। कानून के अनुसार किसी को मृत घोषित किया जा सकता है सिर्फ तब, जब शव मिल जाए या वह सात साल तक लापता रहे। राजू खापरे ने कहा, “हमारे पास जीविका के लिए सीमित साधन हैं और बच्चे बहुत छोटे हैं। प्रशासन से थोड़ी मदद उनके भविष्य के लिए बहुत उपयोगी होगी।”

प्रशासन की प्रतिक्रिया:
हरदा कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने परिवार की मुश्किलों को समझते हुए कहा कि नियमों के अनुसार सहायता का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि रेड क्रॉस के माध्यम से कुछ वित्तीय सहायता प्रदान करने की कोशिश की जाएगी। मामला अभी एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल) में विचाराधीन है।

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