Tuesday, July 21

School Meme Case: टीचर का मीम बनाने पर 13 साल के छात्र को स्कूल से निकाला, मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, MP सरकार को नोटिस

भोपाल/इंदौर: इंदौर के एक स्कूल द्वारा शिक्षक पर आपत्तिजनक मीम बनाने के आरोप में 13 वर्षीय छात्र को निकालने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने मध्य प्रदेश सरकार और अन्य पक्षों से जवाब मांगा है।

याचिका का तर्क
छात्र के पिता का कहना है कि 9वीं कक्षा के बीच में स्कूल से निकालने के कारण उनके बेटे का भविष्य और 10वीं कक्षा का रजिस्ट्रेशन खतरे में पड़ गया है। याचिका में यह भी दावा किया गया कि स्कूल का यह कदम केवल प्रतिष्ठा की रक्षा का बहाना था, क्योंकि मीम अकाउंट प्राइवेट था और सीधे स्कूल प्रशासन के लिए खुला नहीं था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा—बच्चे सीखते हैं अपने माहौल से
पीठ ने कहा कि बच्चे आमतौर पर अपने आसपास के माहौल से सीखते हैं, और ऐसे मीम्स को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता के वकील निपुन सक्सेना ने दंड को अत्यधिक और असमान बताया। उन्होंने कहा कि अकाउंट प्राइवेट था और इसे कम से कम तीन बच्चों द्वारा चलाया जा रहा था, जिन्हें स्कूल से पहले ही निकाला जा चुका था।

शिक्षा पर असर
याचिका में बताया गया है कि इस कार्रवाई से छात्र की 10वीं कक्षा की पढ़ाई प्रभावित हुई है। ICSE बोर्ड के नियमों के अनुसार 10वीं के लिए रजिस्ट्रेशन 9वीं में ही होता है। इस कार्रवाई के कारण बच्चे की शैक्षणिक निरंतरता और स्थिरता गंभीर खतरे में आ गई है।

सुनवाई की तारीख
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 13 फरवरी को तय की है।

यह मामला शिक्षा और डिजिटल मीडिया के बीच नाबालिगों की स्वतंत्रता और दंड के अधिकार को लेकर अहम कानूनन पहलुओं को सामने ला रहा है।

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