Tuesday, July 21

झालाना वन में दिखाई दिया दुर्लभ ओरिएंटल स्कॉप्स उल्लू

जयपुर: राजधानी जयपुर के झालाना वन क्षेत्र में एक बार फिर दुर्लभ शीतकालीन प्रवासी पक्षी ओरिएंटल स्कॉप्स उल्लू नजर आया है। वन्यजीव विशेषज्ञ रोहित गंगवाल ने इसकी पुष्टि की है। इस क्षेत्र में करीब 45 तेंदुए रहते हैं, और अब इनके बीच इस उल्लू की उपस्थिति जैव विविधता के लिए खुशी का संकेत है।


पूर्वी एशिया से भारत तक का लंबा सफर

ओरिएंटल स्कॉप्स उल्लू मुख्य रूप से पूर्वी एशिया के विभिन्न देशों में पाया जाता है। सर्दियों के मौसम में यह सीमित संख्या में भारत की ओर प्रवास करता है। राजस्थान जैसे शुष्क प्रदेश में इस प्रजाति का रिकॉर्ड होना वन्यजीव दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। इससे पर्यावरण और वन्यजीव प्रेमियों में खास उत्साह देखा जा रहा है।


2017 के बाद फिर दिखाई दी दुर्लभ प्रजाति

वन्यजीव विशेषज्ञ रोहित गंगवाल के अनुसार, इस उल्लू को पहली बार 2017 में झालाना क्षेत्र में देखा गया था। इसके बाद कुछ वर्षों तक यह नियमित रूप से दिखाई देता रहा, लेकिन पिछले दो सालों में इसकी कोई उपस्थिति दर्ज नहीं हुई थी। लंबे अंतराल के बाद फिर दिखाई देना शोधकर्ताओं और पक्षी प्रेमियों के लिए उत्साहजनक संकेत है।

शहरी जंगल में अनुकूल पर्यावरण का प्रमाण

विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी जंगल में इस तरह की दुर्लभ प्रजातियों की वापसी यह दर्शाती है कि यहां का पर्यावरण और जैव विविधता सुरक्षित और अनुकूल बनी हुई है। यह उल्लू आमतौर पर घने पेड़ों में छिपकर रहता है, जिससे इसे पहचानना चुनौतीपूर्ण होता है।

वन संरक्षण के प्रयासों की सफलता

वन विभाग और पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार, दुर्लभ प्रजातियों की मौजूदगी जंगल संरक्षण की सफलता को दर्शाती है। झालाना क्षेत्र न केवल स्थानीय बल्कि प्रवासी पक्षियों के लिए भी सुरक्षित आश्रय बना हुआ है।

तेंदुओं के लिए भी प्रसिद्ध है झालाना

जयपुर स्थित झालाना लेपर्ड रिजर्व देश का पहला शहरी आरक्षित वन है, जो विशेष रूप से तेंदुओं के संरक्षण के लिए जाना जाता है। 20 वर्ग किलोमीटर में फैले इस वन में 45 से अधिक तेंदुए और उनके शावक निवास करते हैं। अब तेंदुओं के साथ-साथ दुर्लभ पक्षियों की मौजूदगी ने झालाना को वन्यजीव पर्यटन और शोध के लिहाज से भी खास बना दिया है।

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