Tuesday, July 21

भारत का देसी AI 22 भाषाओं में बोलेगा, खेती-किसानी समेत स्वास्थ्य और कानून में देगा समाधान

नई दिल्ली: भारत अब विदेशी एआई सिस्टम पर निर्भर रहने के बजाय अपना देसी, सुरक्षित और भारतीय भाषाओं पर आधारित एआई प्लेटफॉर्म तैयार कर रहा है। यह प्लेटफॉर्म डिजिटल इंडिया को नई दिशा देगा और आम जनता के लिए टेक्नोलॉजी को और सुलभ बनाएगा।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए बताया कि देश का पहला सरकारी और सॉवरेन AI मॉडल, ‘भारत जेनएआई’ इसी महीने टेक्स्ट आधारित संस्करण के रूप में तैयार हो जाएगा। यह प्रणाली केवल अंग्रेजी तक सीमित नहीं होगी, बल्कि हिंदी, तमिल, तेलुगु, बंगाली, मराठी, उर्दू सहित भारत की सभी प्रमुख भाषाओं में संवाद कर सकेगी।

15 भाषाओं में पहले ही तैयार स्पीच और विजन क्षमताएं

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि भारत जेनएआई इंडिया एआई मिशन के तहत विकसित किया जा रहा है और यह राष्ट्रीय फाउंडेशनल लार्ज लैंग्वेज मॉडल के रूप में पेश होगा। इसे भारतीय सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भों और जरूरतों के अनुसार डिज़ाइन किया गया है।

स्पीच (बोलने) और विजन (देखने) क्षमताएं पहले ही 15 भारतीय भाषाओं में विकसित की जा चुकी हैं और इसे चरणबद्ध तरीके से और अधिक भाषाओं तक विस्तारित किया जाएगा।

खेती, स्वास्थ्य और कानून में मिलेगा फायदा

सरकार का कहना है कि भारत जेनएआई सिर्फ चैट या जानकारी देने तक सीमित नहीं रहेगा। इसका उपयोग कृषि, आयुर्वेद, स्वास्थ्य सेवाओं, कानूनी सहायता जैसे क्षेत्रों में भी किया जाएगा, ताकि आम लोगों को सीधा लाभ मिल सके।

राष्ट्रीय कंसोर्टियम का नेतृत्व IIT बॉम्बे कर रहा है

इस परियोजना का नेतृत्व IIT बॉम्बे कर रहा है, जिसमें IIT मद्रास, IIT हैदराबाद, IIT कानपुर, IIT मंडी और IIT इंदौर जैसे प्रमुख संस्थान शामिल हैं। मंत्री ने बताया कि दुनिया के कई देशों में AI मॉडल एक जैसी भाषा और संस्कृति वाले समाज के लिए बनाए जाते हैं, लेकिन भारत जेनएआई को भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।

एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी हब

भारत जेनएआई के तीन मुख्य हिस्से होंगे – टेक्स्ट, स्पीच और विजन। देशभर में 25 टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब बनाए गए हैं। एआई विकास के लिए जरूरी कंप्यूटिंग संसाधन जैसे GPU और सर्वर सब्सिडी दरों पर उपलब्ध कराए जाएंगे।

सरकार ने 1 लाख करोड़ रुपये का रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन फंड भी शुरू किया है, जिससे एआई और नई टेक्नोलॉजी के विकास को वित्तीय मदद मिलेगी। निजी क्षेत्र की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी।

मंत्री ने साफ किया कि भारत जेनएआई सरकारी स्वामित्व वाला सॉवरेन सिस्टम होगा, लेकिन यह आम जनता, स्टार्टअप और संस्थानों के लिए खुला रहेगा। इसके इस्तेमाल, डेटा सुरक्षा और कीमत को लेकर स्पष्ट नियम बनाए जा रहे हैं।

This slideshow requires JavaScript.

Leave a Reply

This slideshow requires JavaScript.