Tuesday, July 21

शहडोल में सीएम मोहन यादव के काफिले के पास पहुंचे कांग्रेसी, कलेक्टर ने लाठी भांजकर खदेड़ा

शहडोल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के एक दिवसीय शहडोल दौरे के दौरान उस समय हालात तनावपूर्ण हो गए, जब कांग्रेस कार्यकर्ता काले झंडे लेकर मुख्यमंत्री के काफिले के बेहद करीब पहुंच गए। प्रदर्शनकारियों ने बीच सड़क पर उतरकर नारेबाजी शुरू कर दी और काफिले को रोकने की कोशिश की।

घटना गोपालपुर तिराहे के पास हुई, जहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अचानक काफिले के सामने आकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। कुछ देर के लिए प्रशासन और पुलिस व्यवस्था में अफरा-तफरी मच गई।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, बड़ी प्रशासनिक चूक

मुख्यमंत्री का कार्यक्रम पहले से निर्धारित था, ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन को सतर्क रहना था। लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस कार्यकर्ता बिना रोक-टोक के काफिले के पास तक पहुंच गए, जिससे प्रशासन की बड़ी चूक सामने आई है।

बताया जा रहा है कि कांग्रेस ने प्रदर्शन की सूचना पहले ही प्रशासन को दे दी थी, फिर भी ट्रैफिक और सुरक्षा प्रबंधन में लापरवाही उजागर हुई।

कलेक्टर ने खुद संभाला मोर्चा, लाठी मारने का वीडियो वायरल

स्थिति बिगड़ती देख पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को हटाने का प्रयास किया। इसी दौरान शहडोल कलेक्टर केदार सिंह ने स्वयं मोर्चा संभालते हुए एक कॉन्स्टेबल से लाठी लेकर प्रदर्शन कर रहे एक कांग्रेस कार्यकर्ता पर लाठी भांज दी।

इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कलेक्टर द्वारा लाठी चलाते हुए देखा जा सकता है। वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।

महिला कार्यकर्ता भी रहीं शामिल, कई प्रदर्शनकारी हिरासत में

प्रदर्शन में महिला कांग्रेस कार्यकर्ता भी शामिल थीं। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई प्रदर्शनकारियों को मौके से हिरासत में लिया और थाने ले जाकर नजरबंद कर दिया। साथ ही उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है।

कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप, आंदोलन की चेतावनी

इस घटना को लेकर कांग्रेस नेताओं में भारी नाराजगी देखी गई। शहडोल कांग्रेस कमेटी के जिला अध्यक्ष अजय अवस्थी ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारियों का रवैया बर्बरता पूर्ण रहा और लोकतंत्र में इस तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता।

उन्होंने चेतावनी दी कि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर आने वाले समय में बड़े आंदोलन की रणनीति तैयार करेगी।


घटना के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। अब देखना होगा कि इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी तय होती है या नहीं।

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