Tuesday, July 21

लोकसभा स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव संसद में तीन बार आ चुका है, जानिए क्या है पूरी संवैधानिक प्रक्रिया

नई दिल्ली। संसद में जारी गतिरोध के बीच विपक्ष की ओर से लोकसभा स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव लाने की चर्चा तेज हो गई है। लोकतंत्र में लोकसभा स्पीकर का पद निष्पक्षता और संवैधानिक मर्यादा का प्रतीक माना जाता है, लेकिन यदि स्पीकर की भूमिका पर सवाल उठते हैं तो संविधान में उन्हें पद से हटाने की एक निर्धारित प्रक्रिया भी मौजूद है।

लोकसभा के पूर्व महासचिव पी. डी. टी. आचारी के अनुसार, स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं, बल्कि संविधान के तहत “रिजॉल्यूशन टू रिमूव स्पीकर” यानी स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव लाया जाता है।

संविधान में दर्ज है प्रक्रिया

लोकसभा स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 94(e) और लोकसभा के नियमों में स्पष्ट रूप से दर्ज है। इसके तहत लोकसभा का कोई भी सदस्य स्पीकर को हटाने के लिए लिखित नोटिस लोकसभा सचिवालय को दे सकता है। आमतौर पर यह नोटिस दो सांसद मिलकर देते हैं।

नोटिस में स्पीकर के खिलाफ लगाए जाने वाले आरोपों को स्पष्ट, ठोस और सटीक कारणों के रूप में दर्ज करना अनिवार्य होता है। इसे “स्पेसिफिक चार्ज” के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

विपक्ष को खुलकर बोलने का मिलता है अवसर

पी. डी. टी. आचारी के अनुसार, आजादी के बाद अब तक यह प्रक्रिया कई बार अपनाई गई है, लेकिन आज तक किसी भी लोकसभा स्पीकर को इस प्रक्रिया के तहत हटाया नहीं जा सका है।

हालांकि, इसका बड़ा राजनीतिक प्रभाव यह होता है कि इस प्रस्ताव के जरिए विपक्ष को सदन के भीतर स्पीकर की कार्यप्रणाली और भूमिका पर खुलकर चर्चा करने का संवैधानिक अवसर मिल जाता है। सामान्य परिस्थितियों में सांसद स्पीकर पर सीधे आरोप लगाने से बचते हैं, क्योंकि यह सदन की मर्यादा से जुड़ा विषय माना जाता है।

इतिहास में तीन बार आया प्रस्ताव

लोकसभा के इतिहास में स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव अब तक तीन बार लाया जा चुका है—

  1. 15 दिसंबर 1954 – देश के पहले लोकसभा स्पीकर जी. वी. मावलनकर के खिलाफ समाजवादी नेता विग्नेश्वर मिश्रा ने प्रस्ताव रखा।

  2. 24 नवंबर 1966 – तत्कालीन स्पीकर सरदार हुकुम सिंह के खिलाफ समाजवादी नेता मधु लिमये ने प्रस्ताव पेश किया।

  3. 15 अप्रैल 1987 – स्पीकर बलराम जाखड़ के खिलाफ सीपीएम सांसद सोमनाथ चटर्जी द्वारा प्रस्ताव लाया गया।

कैसे हटाया जा सकता है लोकसभा स्पीकर?

लोकसभा नियमों के अनुसार—

  • नोटिस मिलने के बाद कम से कम 14 दिन के अंतराल पर इसे सदन की कार्यसूची में शामिल किया जाता है।

  • प्रस्ताव सदन में पेश होने के समय इसके समर्थन में कम से कम 50 सांसदों का खड़ा होना जरूरी होता है।

  • समर्थन मिलने के बाद प्रस्ताव पर बहस होती है।

  • फिर वोटिंग कराई जाती है।

  • यदि प्रस्ताव बहुमत से पारित हो जाता है, तभी स्पीकर को पद से हटाया जा सकता है।

निष्कर्ष

लोकसभा स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह संवैधानिक और नियमबद्ध है। इतिहास में तीन बार प्रस्ताव जरूर आया है, लेकिन अब तक कोई भी स्पीकर इस प्रक्रिया में पद से हटाया नहीं गया। फिर भी, यह प्रस्ताव संसद में विपक्ष के लिए स्पीकर की भूमिका पर सवाल उठाने का एक बड़ा मंच बन जाता है।

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