Tuesday, July 21

मोहन भागवत के बयान पर राज ठाकरे का तीखा हमला, बोले- “उबाऊ प्रवचन सुनने नहीं, मोदी सरकार के डर से आए लोग”

मुंबई: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के भाषा संबंधी बयान को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। राज ठाकरे ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मोहन भागवत पर निशाना साधते हुए उनके भाषण को “नीरस और उबाऊ” बताया और कार्यक्रम में मौजूद लोगों को लेकर भी कटाक्ष किया।

दरअसल, मुंबई के वर्ली स्थित नेहरू केंद्र सभागार में आरएसएस की शताब्दी के अवसर पर आयोजित व्याख्यान कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा था कि “भाषा पर जोर देना और उसके लिए आंदोलन करना एक तरह की बीमारी है।” इसी बयान पर राज ठाकरे भड़क गए।

राज ठाकरे बोले- “लोग प्रेम से नहीं, डर से पहुंचे कार्यक्रम में”

राज ठाकरे ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि 8 फरवरी को आयोजित कार्यक्रम में कई गणमान्य लोग उपस्थित थे, लेकिन वे मोहन भागवत के प्रति स्नेह के कारण नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के डर के कारण वहां पहुंचे।

राज ठाकरे ने तंज कसते हुए कहा,
“इससे पहले ऐसे उबाऊ और नीरस प्रवचनों में कोई क्यों आता था?”

उन्होंने यह भी कहा कि संघ प्रमुख को यह गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए कि लोग उन्हें सुनने आए थे।

“भाषाई पहचान देश के अधिकांश राज्यों में है”

राज ठाकरे ने कहा कि यदि भाषा और क्षेत्र के प्रति प्रेम को बीमारी कहा जा रहा है, तो यह बीमारी देश के लगभग हर राज्य में फैली हुई है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कर्नाटक, तमिलनाडु, पंजाब, पश्चिम बंगाल और गुजरात सहित कई राज्यों में भाषाई और प्रांतीय पहचान की भावना मजबूत है।

गुजरात का उदाहरण देकर संघ पर सवाल

राज ठाकरे ने सवाल उठाया कि जब दूसरे राज्यों से बड़ी संख्या में लोग पलायन कर किसी राज्य में जाते हैं और वहां की भाषा-संस्कृति को नजरअंदाज करते हैं, तो स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ता है।

उन्होंने पूछा कि यदि यह सच में “बीमारी” है तो संघ प्रमुख गुजरात में सद्भाव का पाठ पढ़ाने क्यों नहीं गए, जब वहां उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों को निकाले जाने की घटनाएं सामने आई थीं।

भैयाजी जोशी के बयान का भी जिक्र

राज ठाकरे ने आरएसएस नेता भैयाजी जोशी के पुराने बयान का हवाला देते हुए कहा कि चुनावों से पहले यह कहकर मराठी लोगों को उकसाया गया कि मुंबई की भाषा केवल मराठी नहीं, गुजराती भी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब अप्रत्यक्ष रूप से राजनीतिक लाभ के लिए किया गया और सवाल उठाया कि जो संगठन खुद को गैर-राजनीतिक बताता है, वह ऐसे मामलों में हस्तक्षेप क्यों कर रहा है।

“हिंदुत्व को जबरदस्ती फिट करने की कोशिश न करें”

राज ठाकरे ने कहा कि संघ के कार्यों का सम्मान किया जा सकता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि वह राजनीतिक रुख अपनाए। उन्होंने कहा कि पहले सरकार द्वारा पूरे देश में हिंदी थोपने के प्रयासों पर आवाज उठाई जाए, फिर महाराष्ट्र को सद्भाव का उपदेश दिया जाए।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि
“हमारे लिए मराठी भाषा और मराठी लोग सर्वोपरि हैं।”

राज ठाकरे का ऐलान- “मराठी अस्मिता पर समझौता नहीं”

राज ठाकरे ने कहा कि देश में भाषाई और क्षेत्रीय पहचानें बनी रहेंगी और महाराष्ट्र में भी यह भावना हमेशा मजबूत रहेगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि परिस्थितियां बनीं तो महाराष्ट्र पूरी ताकत से विद्रोह करेगा।

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