Tuesday, July 21

राजस्थान में वक्फ संपत्ति दावों की धड़ाधड़ अस्वीकृति, देश में सबसे अधिक रिजेक्शन

जयपुर। राजस्थान में वक्फ संपत्तियों के सत्यापन और डिजिटलीकरण की प्रक्रिया में बड़ा खुलासा हुआ है। राज्य में अब तक 4,802 वक्फ दावों को खारिज किया जा चुका है। यह आंकड़ा देश में वक्फ कानून लागू होने के बाद सबसे अधिक अस्वीकृत दावों का प्रतिनिधित्व करता है।

राजस्थान में वक्फ संपत्तियों की स्थिति

राजस्थान में कुल 31,000 से अधिक वक्फ अचल संपत्तियां दर्ज हैं। अब तक 23,000 से अधिक संपत्तियों का डेटा अपलोड किया गया है। जांच के दौरान वैध दस्तावेज न होने, राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज न होने या दोहरी प्रविष्टियों के कारण 4,802 दावे खारिज किए गए।

देशभर में वक्फ संपत्तियों का सत्यापन

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देशभर में कुल 8,72,802 वक्फ अचल संपत्तियां दर्ज हैं। इनमें से लगभग 5,82,541 संपत्तियों का विवरण डिजिटल पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है। दस्तावेजों की कमी और रिकॉर्ड में खामियों के कारण 24,696 वक्फ दावों को अस्वीकार किया गया, जिसमें सबसे ज्यादा अस्वीकृति राजस्थान से हुई।

टॉप-10 राज्य: खारिज वक्फ दावों का विवरण

रैंक राज्य कुल वक्फ अचल संपत्तियां खारिज वक्फ दावे
1 राजस्थान 22,000 4,802
2 तेलंगाना 58,000 4,458
3 महाराष्ट्र 63,000 3,679
4 पश्चिम बंगाल 58,000 1,765
5 केरल 46,000 1,182
6 मध्य प्रदेश 27,000 1,178
7 कर्नाटक 58,000 1,166
8 उत्तर प्रदेश 98,000 1,472
9 गुजरात 27,000 998
10 पंजाब 26,000 223

संशोधित वक्फ कानून का प्रभाव

हाल ही में लागू हुए वक्फ संशोधन कानून के तहत ट्रिब्यूनल प्रक्रिया में बदलाव किए गए हैं और राज्य बोर्डों में महिलाओं एवं गैर-मुस्लिम सदस्यों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। विपक्ष का आरोप है कि पुराने कानून में वक्फ बोर्ड को अत्यधिक अधिकार दिए गए थे, जिससे कई संपत्तियों पर मनमाने तरीके से दावा किया गया। सुप्रीम कोर्ट में कुछ प्रावधानों को चुनौती दी गई है और अंतरिम आदेश के तहत कुछ धाराओं का अमल रोका गया है।

खारिज होने के मुख्य कारण

  1. वैध दस्तावेज का अभाव

  2. राजस्व रिकॉर्ड में नाम का न होना

  3. पहले से निजी अथवा सरकारी भूमि पर दावा

  4. अपूर्ण जानकारी और दोहरी प्रविष्टियां

राजस्थान में इस सत्यापन प्रक्रिया ने वक्फ संपत्तियों के डिजिटल रिकॉर्डिंग और पारदर्शिता के प्रयासों को उजागर किया है, लेकिन कई विवादित मामलों की जाँच और अंतिम निर्णय अब भी न्यायालय के आदेश के अधीन है।

This slideshow requires JavaScript.

Leave a Reply

This slideshow requires JavaScript.