Tuesday, July 21

अयोध्या में ध्वजारोहण, सीतामढ़ी में विवाहोत्सव: जानकी जन्मभूमि पुनौराधाम में सदियों पुरानी परंपरा का उल्लास

सीतामढ़ी/अयोध्या: भगवान श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या, माता सीता की प्राकट्यस्थली सीतामढ़ी और उनके विवाह स्थल जनकपुर – ये तीनों पौराणिक स्थल आपस में धार्मिक रूप से जुड़े हुए हैं। माता सीता के पिता राजा जनक के गृह जनकपुर में भगवान राम और माता सीता का विवाह हुआ था। इसी अवसर पर हर साल मिथिला क्षेत्र में विवाह पंचमी अत्यंत धूमधाम और उल्लास के साथ मनाई जाती है।

सीतामढ़ी में उत्सव की तैयारी:
अयोध्या में रामलला मंदिर पर 25 नवंबर को पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा ध्वजारोहण कार्यक्रम होगा। वहीं, सीतामढ़ी में जानकी जन्मभूमि पुनौराधाम और शहर स्थित जानकी मंदिर में विवाह पंचमी को लेकर विशेष तैयारी की गई है। महंत कौशल किशोर दास के शिष्य रामकुमार दास ने बताया कि सोमवार को पूजा-मटकोर और मंगलवार को विवाहोत्सव का मुख्य कार्यक्रम आयोजित होगा। शाम 7.30 बजे पूजा-मटकोर और 8.30 बजे हल्दी कार्यक्रम के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे।

मिथिला में विवाह पंचमी की विशेष मान्यता:
मिथिला क्षेत्र में सदियों से यह विश्वास है कि इस तिथि पर माता जानकी का विवाह भगवान श्रीराम के साथ हुआ था। आचार्य मुकेश कुमार मिश्र के अनुसार, इस दिन विवाह करना अपशगुन माना जाता है। हालांकि, महिलाएं उपवास रखकर पूजा-अर्चना करती हैं। मान्यता है कि इस दिन उपवास कर माता जानकी और भगवान राम की पूजा करने वाली अविवाहित युवतियों को मनचाहा जीवनसाथी मिलता है, जबकि सुहागिन स्त्रियों का दांपत्य जीवन खुशहाल रहता है।

जनकपुर में भी भव्य आयोजन:
नेपाल के जनकपुर में भी विवाह पंचमी पर प्रभु श्रीराम और माता सीता के मंदिर में भव्य कार्यक्रम आयोजित होता है। लाखों श्रद्धालु इस पावन अवसर पर दर्शन के लिए आते हैं। वहीं, सीतामढ़ी में हजारों श्रद्धालु इस उत्सव में शामिल होते हैं, खासकर महिलाएं बड़ी संख्या में पहुंचती हैं।

इस प्रकार, मिथिला क्षेत्र में विवाह पंचमी सदियों पुरानी परंपरा और धार्मिक आस्था का प्रतीक बनकर उल्लास और श्रद्धा का उत्सव प्रस्तुत करती है।

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