Tuesday, July 21

कर्नाटक में शीतकालीन सत्र में पेश होगा रोहित वेमुला बिल, कॉलेजों में जाति-आधारित भेदभाव पर लगेगा अंकुश

बेंगलुरु: कर्नाटक की कांग्रेस सरकार 8 दिसंबर से बेलगावी में शुरू होने वाले शीतकालीन सत्र में रोहित वेमुला (बहिष्कार या अन्याय निवारण) विधेयक, 2025 पेश करने जा रही है। यह विधेयक हैदराबाद विश्वविद्यालय में दलित पीएचडी छात्र रोहित वेमुला की याद में लाया जा रहा है, जिन्होंने लगभग एक दशक पहले उत्पीड़न और मानसिक दबाव के चलते आत्महत्या कर ली थी।

बिल का उद्देश्य:
इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य राज्य के सरकारी और निजी कॉलेजों तथा विश्वविद्यालयों में जाति-आधारित भेदभाव और उत्पीड़न को रोकना है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी के दबाव के बाद सरकार ने इस कदम को तेज किया है।

किस तरह काम करेगा कानून:
मसौदे के अनुसार, किसी भी छात्र, शिक्षक या गैर-शिक्षण कर्मचारी को अगर जातिगत उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है, तो वह नई समता समिति में शिकायत दर्ज करा सकता है। ज़रूरत पड़ने पर मामला जिला या हाई कोर्ट तक भी ले जाया जा सकता है।

कहाँ-कहाँ लागू होगा कानून:
यह कानून केवल कॉलेज या विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित नहीं होगा। यह शिक्षण संस्थान परिसर, कक्षाएं, छात्रावास, स्वास्थ्य केंद्र, खेल मैदान, कर्मचारी आवास, सार्वजनिक क्षेत्र, कैंटीन, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और संस्थान के ट्रांसपोर्ट तक लागू होगा। Essentially, जहां भी छात्र, शिक्षक या कर्मचारी एक-दूसरे से मिलते-जुलते हैं।

विशेष महत्व:
इस बिल के लागू होने से कर्नाटक में उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न पर कानूनी नियंत्रण सख्त होगा। यह छात्रों और कर्मचारियों के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

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