Tuesday, July 21

एमपी के मूल निवासी छात्रों के साथ भेदभाव? PG NEET काउंसलिंग पर हाईकोर्ट ने सरकार को भेजा नोटिस

मध्य प्रदेश में मेडिकल पीजी सीटों के आवंटन को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। राज्य के मूल निवासी छात्रों ने आरोप लगाया है कि मौजूदा पीजी नीट काउंसलिंग नियमों में उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। इसी मुद्दे पर दाखिल याचिका पर एमपी हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन (DME) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

मूल निवासियों के हितों की अनदेखी का आरोप
बालाघाट निवासी डॉ. विवेक जैन और रतलाम के डॉ. दक्ष गोयल की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि प्रदेश के 15 मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध 1468 पीजी सीटों में से 50% सीटें ऑल इंडिया कोटे के लिए निर्धारित हैं। शेष 50% राज्य कोटे की सीटों में ओबीसी, एससी, एसटी और ईडब्ल्यूएस कोटा लागू होने के बाद सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के हिस्से में मात्र 518 सीटें आती हैं।

याचिका के अनुसार संशोधित नियमों में पहले व दूसरे राउंड की काउंसलिंग में केवल एमपी से एमबीबीएस करने वाले छात्रों को शामिल किया जा सकता है। इतना ही नहीं, इन चरणों में शामिल होने वाले छात्र मॉप-अप राउंड में भी भाग नहीं ले सकते। इस व्यवस्था के कारण “प्रदेश में पढ़े छात्रों को 100% आरक्षण जैसा लाभ” स्वतः मिल रहा है, जबकि मूल निवासी होने का मानदंड पूरी तरह हट गया है।

अन्य राज्यों में लागू है ‘मूल निवासी प्राथमिकता’
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि देश के कई राज्यों में स्थानीय (मूल निवासी) छात्रों को ही प्रथम प्राथमिकता दी जाती है, चाहे उन्होंने एमबीबीएस किसी अन्य राज्य से ही क्यों न किया हो। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कई निर्णयों में भी राज्य कोटे की सीटों में मूल निवासियों को प्राथमिकता देने का उल्लेख है। इसके विपरीत एमपी सरकार ने नियमों से ‘मूल निवासी’ शब्द हटाकर अन्यायपूर्ण स्थिति बना दी है।

हाईकोर्ट की सख्ती, मांगा विस्तृत जवाब
मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब तलब किया है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आदित्य संघी ने पैरवी की।

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