Tuesday, July 21

राबड़ी देवी के आवास से रात में क्यों हटाए जा रहे सामान? जदयू ने भवन निर्माण विभाग से जांच की मांग

 

 

पटना। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को आवंटित 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास को खाली किए जाने की प्रक्रिया पर सियासत गरमा गई है। जनता दल (यूनाइटेड) ने इस पूरे मामले पर गंभीर सवाल उठाते हुए भवन निर्माण विभाग से तत्काल जांच की मांग की है।

 

जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने भवन निर्माण विभाग के मंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राबड़ी देवी और उनके परिवार की अनुपस्थिति में सरकारी आवास को खाली किया जा रहा है। उन्होंने चिंता जताई कि रात्रि के समय पिकअप वैन के जरिए आवास परिसर से गमले और पौधे बाहर ले जाए गए, जिससे कई आशंकाएं उत्पन्न होती हैं।

 

सरकारी संपत्ति या निजी? स्पष्ट करे विभाग

 

नीरज कुमार ने सवाल उठाया कि आवास परिसर में लगे गमले और पौधे उद्यान विभाग की संपत्ति हैं या निजी। यदि वे सरकारी संपत्ति हैं, तो उन्हें किसके आदेश और अनुमति से हटाया गया। साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि परिवार की अनुपस्थिति में पिकअप वैन को परिसर में प्रवेश की अनुमति किसके निर्देश पर दी गई।

 

उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी का परिवार वर्ष 2006 से इस सरकारी आवास में निवासरत रहा है, ऐसे में आवास खाली करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के अनुरूप होनी चाहिए।

 

सरकारी सामग्री की सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी

 

पत्र में जदयू प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि भवन निर्माण विभाग का यह दायित्व है कि आवास खाली किए जाने के दौरान पंखा, एसी, फर्नीचर, बाथरूम फिटिंग, नल-टोंटी, गीजर, कमोड, खिड़की-दरवाजों के पर्दे समेत सभी सरकारी सामग्री सुरक्षित और यथास्थान उपलब्ध रहे।

 

राजनीतिक विवाद की आशंका

 

नीरज कुमार ने आगाह किया कि विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव द्वारा पूर्व में भी निराधार आरोप लगाए जाते रहे हैं। ऐसे में यदि परिवार की अनुपस्थिति में आवास खाली किया गया और किसी भी प्रकार की सामग्री गायब हुई, तो भविष्य में अनावश्यक राजनीतिक विवाद खड़ा किया जा सकता है।

 

भौतिक सत्यापन और दस्तावेजीकरण की मांग

 

पत्र के अंत में जदयू नेता ने भवन निर्माण विभाग से आग्रह किया कि पूरी प्रक्रिया की विधिवत निगरानी कराई जाए, सभी परिसंपत्तियों का भौतिक सत्यापन हो और हर कदम का दस्तावेजीकरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी तरह के भ्रम, आरोप या राजनीतिक दुष्प्रचार की कोई गुंजाइश न रहे।

 

इनपुट: आईएएनएस

 

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