Tuesday, July 21

मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए दो बच्चों की शर्त हटने वाली है, मोहन यादव सरकार जल्द करेगी कैबिनेट मंजूरी

 

भोपाल (आकाश सिकरवार) – राजस्थान और छत्तीसगढ़ के रास्ते पर चलते हुए मध्य प्रदेश सरकार सरकारी नौकरियों में लागू दो बच्चों की शर्त को हटाने की तैयारी में है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस प्रस्ताव को विधि विभाग की सलाह के बाद तैयार कर लिया है और इसे जल्द ही कैबिनेट में अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

 

यह बदलाव राज्य के कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत लेकर आएगा, क्योंकि इससे उन कर्मचारियों को लाभ होगा जो इस नियम के कारण सरकारी नौकरी के लिए अपात्र हो गए थे या जिनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं।

 

2001 से लागू था नियम

यह नियम 26 जनवरी, 2001 से लागू था, जिसके तहत तीसरा बच्चा होने पर नौकरी नहीं दी जाती थी और नौकरी में रहते हुए तीसरे बच्चे के जन्म पर सेवा समाप्त कर दी जाती थी। यह नियम उस समय लागू किया गया था जब प्रदेश में प्रजनन दर अधिक थी। हालांकि, सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) बुलेटिन 2023 के अनुसार, मध्य प्रदेश की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 2.4 है, जो भारत की टीएफआर 1.9 से अधिक है। शहरी क्षेत्रों में यह दर 1.8 और ग्रामीण क्षेत्रों में 2.6 है।

 

कर्मचारियों को मिलेगा लाभ

इस नए नियम से स्कूल, उच्च शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा और अन्य विभागों के कर्मचारियों को लाभ होगा। हालांकि, जिन कर्मचारियों पर पहले ही कार्रवाई हो चुकी है, उन्हें इस नए नियम से कोई राहत नहीं मिलेगी, क्योंकि इसे पिछली तारीख से लागू नहीं किया जाएगा।

 

परिवीक्षा अवधि में भी बड़ा बदलाव

साथ ही, कर्मचारियों की परिवीक्षा (प्रोबेशन) अवधि को लेकर भी नियमों में संशोधन किया जा रहा है। अब कर्मचारियों को परिवीक्षा अवधि पूरी होने के छह महीने के भीतर नियमित कर दिया जाएगा, जिससे उनकी वार्षिक वेतनवृद्धि पर पड़ने वाले प्रभाव को रोका जा सके। इससे पहले, देरी के कारण कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था। मंत्रालय और कर्मचारी संघ लगातार इस बदलाव की मांग कर रहे थे।

 

 

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