Tuesday, July 21

जयपुर RTO घोटाला: 7 डिजिट वाहन नंबर से करीब 500 करोड़ का खुलासा, 39 लोगों पर FIR

 

जयपुर: राजस्थान में बहुचर्चित 7 डिजिट रजिस्ट्रेशन नंबर घोटाले का बड़ा खुलासा हुआ है। जयपुर आरटीओ राजेंद्र सिंह शेखावत ने गांधी नगर पुलिस थाने में 39 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करवाई है। आरटीओ के अनुसार, सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी करके फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मनमाने नंबर अवैध रूप से आवंटित किए गए, जिससे राज्य को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।

 

आरोपियों में परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल

FIR में परिवहन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम शामिल हैं। इनमें संयुक्त आयुक्त धर्मपाल आसीवाल, आरटीओ इन्दु मीणा, एआरटीओ प्रकाश टहलियानी, डीटीओ संजय शर्मा, डीटीओ सुनील सैनी, डीटीओ संजीव भारद्वाज, संस्थापन अधिकारी राज सिंह चौधरी, वरिष्ठ सहायक अयूब खान, लिपिक जहांगीर खान, सुरेश तनेजा, कपिल भाटिया सहित कुल दो दर्जन से अधिक सरकारी अफसरों का नाम है।

 

ईडी ने भी मामले में की एंट्री

करीब 500 करोड़ रुपए के घोटाले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की भी एंट्री हो चुकी है। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 के तहत परिवहन विभाग और जयपुर आरटीओ से कई दस्तावेज तलब किए हैं। ईडी का मानना है कि इस मामले में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और धोखाधड़ी हुई हैं।

 

ईडी ने मांगी चार बिंदुओं पर रिपोर्ट

ईडी ने परिवहन विभाग को पत्र भेजकर चार महत्वपूर्ण बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है:

 

  1. 31 मार्च 2025 को गांधी नगर थाने में दर्ज FIR का विवरण।
  2. एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर सुरेश तनेजा और प्रोग्रामर रामजी लाल मीणा के खिलाफ दर्ज FIR की जानकारी।
  3. जिन 79 वाहनों से गड़बड़ियां सामने आईं, उनसे राजकोष को हुए नुकसान का ब्यौरा।
  4. राजस्थान के सभी RTO कार्यालयों से रिपोर्ट, कि उनके क्षेत्रों में कितने 7 डिजिट वाहन नंबर घोटाले के मामले सामने आए।

 

मामला गंभीर, जांच जारी

जयपुर आरटीओ और गांधी नगर पुलिस की ओर से मामले की गहन जांच जारी है। इस घोटाले ने राज्य में राजकोषीय और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना होगा कि जांच एजेंसियां इस बड़े घोटाले की गुत्थी को किस हद तक सुलझा पाती हैं।

 

 

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